विदेश डेस्क, श्रेयांश पराशर l
तेहरान। पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के जवाब में ईरानी सेना और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने क्षेत्र में मौजूद कई अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाकर हमले किए हैं। ईरानी मीडिया के अनुसार इन हमलों में ड्रोन और अन्य सैन्य साधनों का इस्तेमाल किया गया। रिपोर्टों में दावा किया गया है कि बहरीन में तैनात अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े से जुड़े ठिकानों को भी निशाना बनाया गया।
ईरान ने इन हमलों को अपनी संप्रभुता और सुरक्षा के खिलाफ हुई अमेरिकी कार्रवाई का जवाब बताया है। तेहरान का कहना है कि वह किसी भी प्रकार की सैन्य चुनौती का उचित प्रतिकार करने में सक्षम है और अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाएगा। दूसरी ओर, अमेरिकी प्रशासन ने स्थिति पर नजर बनाए रखने की बात कही है और क्षेत्र में अपने सैनिकों तथा सैन्य प्रतिष्ठानों की सुरक्षा बढ़ा दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच बढ़ता टकराव पूरे पश्चिम एशिया की स्थिरता के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है। खाड़ी क्षेत्र में पहले से मौजूद भू-राजनीतिक तनाव के बीच इस प्रकार की सैन्य कार्रवाई से तेल आपूर्ति, समुद्री व्यापार मार्गों और क्षेत्रीय सुरक्षा पर असर पड़ने की आशंका है।
हालांकि तनावपूर्ण हालात के बीच कूटनीतिक प्रयास भी जारी हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में संकेत दिया था कि मौजूदा विवादों के बावजूद ईरान के साथ समझौते की संभावना पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। इसके बावजूद ताजा घटनाक्रम ने दोनों देशों के बीच अविश्वास को और गहरा कर दिया है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने संयम बरतने की अपील करते हुए दोनों पक्षों से बातचीत के माध्यम से विवाद सुलझाने का आग्रह किया है। आने वाले दिनों में इस संकट की दिशा पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी।







