नेशनल डेस्क, मुस्कान कुमारी।
- ‘महापाप’ करार, पीएम मोदी की चुप्पी पर उठे सवाल
नई दिल्ली। कांग्रेस ने अयोध्या राम मंदिर के दान में कथित गबन को “महापाप” बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोला है। पार्टी ने इसे हिंदुओं की आस्था पर हमला करार दिया और मंदिर ट्रस्ट को भंग करने, एसआईटी रिपोर्ट सार्वजनिक करने तथा स्वतंत्र ऑडिट कराने की मांग की।
कांग्रेस महासचिव और प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनाते ने मंगलवार को दिल्ली स्थित एआईसीसी मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि दान चोरी महज कोई घोटाला नहीं, बल्कि दुनिया भर के एक अरब से ज्यादा हिंदुओं की आस्था पर सीधा हमला है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा शासित केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार ट्रस्ट के वरिष्ठ अधिकारियों को बचाने की कोशिश कर रही है जबकि कार्रवाई केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर हो रही है।
पार्टी ने मांग की है कि पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के किसी वर्तमान न्यायाधीश की निगरानी में हो। कांग्रेस का कहना है कि उत्तर प्रदेश सरकार इस मामले में निष्पक्ष जांच नहीं कर सकती। साथ ही श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भंग किया जाए, उसके पदाधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएं और ट्रस्ट के गठन से लेकर अब तक प्राप्त सभी दान की स्वतंत्र ऑडिट कराई जाए।
SIT रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग
सुप्रिया श्रीनाते ने कहा कि जांच टीम को उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज मात्र 40 दिनों का है जिसमें करीब 70 चोरी के मामले दर्ज हैं। यह कुल गबन का सिर्फ छोटा हिस्सा है। “पिछले पांच साल छह महीने का हिसाब कौन देगा?” उन्होंने पूछा।
पार्टी ने बताया कि अभी तक करीब 80 लाख रुपये बरामद किए गए हैं, लेकिन बाकी दान कहां गया, इसका जवाब सरकार नहीं दे रही। श्रीनाते ने सवाल किया कि क्या मामूली वेतन वाले कर्मचारी बिना उच्च स्तर के संरक्षण के इतना बड़ा घोटाला कर सकते हैं? ट्रस्ट और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के बीच तय मानक प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया और व्हिसलब्लोअर्स की शिकायतों को नजरअंदाज किया गया।
कांग्रेस महासचिव जयराम रamesh ने प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि मंदिर निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा का श्रेय लेने वाले पीएम का इस “लूट” पर चुप रहना करोड़ों लोगों की धार्मिक आस्था पर सीधा हमला है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने ट्रस्ट का गठन बिना पारदर्शिता के किया, उसमें आरएसएस के लोगों को भरा और इसे सूचना का अधिकार कानून के दायरे से बाहर रखा।
ट्रस्ट पर उठे गंभीर सवाल
कांग्रेस ने दावा किया कि आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है, लेकिन असली दोषी ऊपर तक हैं। पार्टी का कहना है कि ट्रस्ट की गतिविधियां पूरी तरह पारदर्शी नहीं रहीं और दानदाताओं के पैसे की सुरक्षा पर उचित ध्यान नहीं दिया गया।
पार्टी ने केंद्र और यूपी सरकार से तुरंत जवाब मांगा है कि वे इस मामले में क्या छिपा रही हैं। एसआईटी रिपोर्ट को सार्वजनिक वेबसाइट पर डालने की मांग दोहराते हुए श्रीनाते ने कहा कि हर नागरिक को सच्चाई जानने का अधिकार है।
मंदिर ट्रस्ट की जवाबदेही पर बहस
अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट पर कांग्रेस का यह हमला राम मंदिर आंदोलन और उसके बाद बने ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर व्यापक बहस छेड़ने वाला है। पार्टी का जोर इस बात पर है कि धार्मिक संस्थानों में दान की पवित्रता बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है।







