विदेश डेस्क, आर्या कुमारी।
नेपीडॉ। म्यांमार की सैन्य सरकार ने देश की प्रमुख लोकतांत्रिक नेता Aung San Suu Kyi को जेल से निकालकर अब उनके आवास पर नजरबंद कर दिया है। सरकारी मीडिया ने आधिकारिक बयानों के हवाले से जानकारी दी कि कैदियों को दी गई आम माफी के तहत उनकी सजा में आंशिक कटौती किए जाने के बाद यह निर्णय लिया गया। इस घटनाक्रम को म्यांमार की मौजूदा राजनीतिक स्थिति के संदर्भ में काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, देश की सत्ता संभाल रहे सैन्य प्रमुख Min Aung Hlaing ने 80 वर्षीय नोबेल पुरस्कार विजेता सू की की सजा का कुछ हिस्सा कम करने का आदेश दिया। साथ ही उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि उनकी शेष सजा जेल के बजाय एक तयशुदा स्थान पर नजरबंदी के रूप में पूरी कराई जाएगी। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर म्यांमार की स्थिति को लेकर लगातार चिंता जताई जा रही है।
सरकारी घोषणा के साथ एक हालिया तस्वीर भी जारी की गई, जिसमें सू की शांत मुद्रा में लकड़ी की बेंच पर बैठी दिखाई देती हैं। उन्होंने पारंपरिक सफेद ब्लाउज और स्कर्ट पहन रखा है। तस्वीर में उनके सामने एक छोटी मेज रखी हुई है और पास में दो अधिकारी मौजूद हैं, जिनमें से एक पुलिस की वर्दी में है जबकि दूसरा किसी अन्य सुरक्षा एजेंसी से जुड़ा प्रतीत होता है। इस तस्वीर के सामने आने के बाद उनके स्वास्थ्य और स्थिति को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।
सू की को 1 फरवरी 2021 को उस समय गिरफ्तार किया गया था, जब म्यांमार की सेना ने उनकी निर्वाचित सरकार को हटाकर सत्ता अपने हाथ में ले ली थी। इस सैन्य तख्तापलट के बाद से देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था बाधित हो गई और बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन देखने को मिले। तभी से सू की लगातार सैन्य हिरासत में रहीं और उनकी राजनीतिक गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लगा दी गई।
गिरफ्तारी के बाद से उन्हें सार्वजनिक रूप से बहुत कम देखा गया है। उनकी आखिरी आधिकारिक तस्वीर 24 मई 2021 को सामने आई थी, जिसमें वे अदालत में पेश होती नजर आई थीं। इसके बाद लंबे समय तक उनकी कोई स्पष्ट सार्वजनिक झलक सामने नहीं आई, जिससे उनके समर्थकों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय में चिंता बनी रही।
वर्ष 2022 के अंत में विभिन्न मामलों में दोषी ठहराते हुए उन्हें कुल 33 वर्ष की सजा सुनाई गई थी। इन मामलों में भ्रष्टाचार, प्रशासनिक उल्लंघन और अन्य कानूनी आरोप शामिल थे। हालांकि हाल ही में घोषित माफी के तहत उनकी सजा में कुछ कमी की गई है, जिसके बाद उन्हें जेल से हटाकर घर में नजरबंद करने का फैसला लिया गया।
सू की के समर्थकों और कई अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों का मानना है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप पूरी तरह से राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित हैं। उनका कहना है कि सेना द्वारा यह कदम उन्हें सक्रिय राजनीति से दूर रखने और देश में अपने नियंत्रण को मजबूत बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा है। वहीं, इस फैसले के बाद भी म्यांमार की राजनीतिक स्थिति और लोकतंत्र की बहाली को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।







