विदेश डेस्क, ऋषि राज
वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच संभावित परमाणु समझौते को लेकर इजरायल में गहरी चिंता देखी जा रही है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इजरायली अधिकारियों को आशंका है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ऐसा समझौता कर सकते हैं, जिसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम, बैलिस्टिक मिसाइलों और क्षेत्रीय प्रभाव से जुड़े सभी मुद्दों का समुचित समाधान नहीं हो पाएगा।
इजरायल का मानना है कि यदि किसी समझौते में केवल यूरेनियम संवर्धन पर सीमित प्रतिबंध लगाए गए और ईरान समर्थित क्षेत्रीय समूहों की गतिविधियों पर ठोस प्रावधान नहीं किए गए, तो यह भविष्य में पश्चिम एशिया की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। इजरायली सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि अधूरा समझौता ईरान को समय देगा और वह अपनी सैन्य क्षमताओं को फिर से मजबूत कर सकता है।
अमेरिकी प्रशासन की ओर से संकेत मिले हैं कि वाशिंगटन कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता देना चाहता है। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि वार्ता के जरिए तनाव कम किया जा सकता है और लंबे समय से चले आ रहे टकराव को रोका जा सकता है। हालांकि इजरायल इस बात पर जोर दे रहा है कि किसी भी समझौते में कठोर निरीक्षण व्यवस्था और स्पष्ट प्रतिबंध शामिल होने चाहिए।
अमेरिका और ईरान के बीच हाल के महीनों में अप्रत्यक्ष संपर्क बढ़ा है। सूत्रों के मुताबिक, कई मध्यस्थ देशों के जरिए संदेशों का आदान-प्रदान हुआ है। इसी पृष्ठभूमि में इजरायल ने अपने रणनीतिक साझेदार अमेरिका को अपनी चिंताओं से अवगत कराया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समझौते में मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय सुरक्षा को शामिल नहीं किया गया, तो इजरायल इसे अपर्याप्त मान सकता है। इससे दोनों सहयोगी देशों के बीच रणनीतिक मतभेद भी उभर सकते हैं।
फिलहाल अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर इस बात पर है कि क्या अमेरिका और ईरान किसी ऐसे समझौते तक पहुंच पाते हैं जो क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित कर सके और सभी पक्षों की सुरक्षा चिंताओं का समाधान कर सके।






