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इजरायल ने दिया फिलस्तीनियों को गाजा छोड़ने का आदेश

विदेश डेस्क, ऋषि राज |

पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने एक बार फिर खतरनाक मोड़ ले लिया है। इजरायल ने बुधवार को गाजा शहर में रह रहे सभी फिलस्तीनियों को तुरंत वहां से निकल जाने का आदेश दिया। इजरायल के रक्षा मंत्री ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि यह फिलस्तीनियों के लिए "आखिरी मौका" है। यदि कोई भी वहां ठहरता है तो उसे आतंकवादी या आतंकवादी समर्थक माना जाएगा और उसे इजरायली सेना के नए हमले का सामना करना पड़ेगा।

रक्षा मंत्री के इस आदेश के बाद गाजा में दहशत का माहौल है। हजारों की संख्या में लोग अपने घर छोड़कर सुरक्षित जगहों की तलाश में निकलने लगे हैं। गाजा पहले से ही लगातार बमबारी और हमलों से तबाह है, ऐसे में लोगों के सामने भोजन, पानी और चिकित्सा सुविधाओं का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। स्थानीय अस्पतालों के अनुसार, इस क्षेत्र में पिछले 24 घंटे में ही 21 फिलस्तीनियों की मौत हो चुकी है।

इजरायल का यह कदम ऐसे समय आया है जब अमेरिका ने गाजा संघर्ष को समाप्त करने के लिए एक शांति प्रस्ताव रखा है। बताया जा रहा है कि यह प्रस्ताव अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से रखा गया है, जिसमें 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले में पकड़े गए कैदियों को रिहा करने की शर्त भी शामिल है। हमास इस प्रस्ताव पर विचार कर रहा है, लेकिन उसने स्पष्ट किया है कि प्रस्ताव में कुछ बिंदु ऐसे हैं जो स्वीकार्य नहीं हैं और उनमें बदलाव होना चाहिए।

इजरायल का कहना है कि गाजा शहर अब आतंकवादियों का गढ़ बन चुका है और वहां रह रहे लोग या तो हमास के साथ जुड़े हैं या फिर आतंकवाद को समर्थन दे रहे हैं। इसी आधार पर उसने आदेश जारी किया है कि शहर खाली कर दिया जाए। इजरायल ने चेतावनी दी है कि यदि लोग शहर से नहीं हटते हैं तो उनके खिलाफ बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई की जाएगी।

इस बीच संयुक्त राष्ट्र और कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने इजरायल से अपील की है कि वह आम नागरिकों को निशाना न बनाए और मानवीय सहायता को गाजा में पहुंचने दिया जाए। गाजा की जनसंख्या पहले ही लंबे समय से नाकेबंदी, गरीबी और हिंसा से जूझ रही है। अब इजरायल का यह नया आदेश वहां के लोगों के लिए जीवन और भी मुश्किल बना रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इजरायल के इस निर्णय से आने वाले दिनों में हालात और बिगड़ सकते हैं। एक तरफ हमास अमेरिका के प्रस्ताव पर विचार कर रहा है, वहीं दूसरी ओर इजरायल के सख्त रुख से वार्ता की संभावनाएं कमजोर पड़ सकती हैं। गाजा छोड़ने को मजबूर हुए लाखों लोगों के सामने शरण और सुरक्षा की गंभीर चुनौती खड़ी हो गई है।