Ad Image
Ad Image
युद्ध समाप्ति पर ईरान के साथ सकारात्मक बातचीत हुई: राष्ट्रपति ट्रंप || बिहार: विजय कुमार सिन्हा, निशांत कुमार, दिलीप जायसवाल, दीपक प्रकाश समेत 32 ने ली शपथ || बिहार में सम्राट सरकार का विस्तार, 32 मंत्रियों ने ली पद और गोपनीयता की शपथ || वोट चोरी का जिन्न फिर निकला, राहुल गांधी का EC और केंद्र सरकार पर हमला || वियतनामी राष्ट्रपति तो लाम पहुंचे भारत, राष्ट्रपति भवन में पारंपरिक स्वागत || टैगोर जयंती पर 9 मई को बंगाल में भाजपा सरकार के शपथ ग्रहण की संभावना || केरल में सरकार गठन की कवायद तेज: अजय माकन और मुकुल वासनिक पर्यवेक्षक || असम में बीजेपी जीत के हैट्रिक की ओर, 101 से अधिक पर बढ़त, कांग्रेस 23 पर सिमटी || पांच राज्यों में मतगणना जारी: बंगाल, असम में भाजपा को बढ़त, केरल में कांग्रेस और तमिलनाडु में टीवीके को बढ़त || तमिलनाडु चुनाव: एक्टर विजय की टीवीके ने किया उलटफेर, 109 सीटो पर बढ़त

The argument in favor of using filler text goes something like this: If you use any real content in the Consulting Process anytime you reach.

  • img
  • img
  • img
  • img
  • img
  • img

Get In Touch

इस्लामाबाद में फिर हो सकती है अमेरिका-ईरान वार्ता

विदेश डेस्क, आर्या कुमारी।

वॉशिंगटन/तेहरान, अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव को कम करने की दिशा में एक बार फिर कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों देशों के बीच अगले सप्ताह पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में नई वार्ता शुरू हो सकती है। यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब व्हाइट हाउस ईरान से संघर्ष समाप्ति प्रस्ताव पर आधिकारिक जवाब का इंतजार कर रहा है।

वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार दोनों पक्ष मध्यस्थ देशों की मदद से 14 बिंदुओं वाले एक प्रारंभिक समझौता ज्ञापन पर काम कर रहे हैं। प्रस्तावित मसौदे में एक महीने तक चरणबद्ध बातचीत चलाने की रूपरेखा तैयार की जा रही है, ताकि मौजूदा टकराव को स्थायी रूप से समाप्त किया जा सके।

रिपोर्ट में कहा गया है कि मसौदे में ईरान के परमाणु कार्यक्रम, होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़े सैन्य तनाव को कम करने और उच्च संवर्धित यूरेनियम के भंडार को किसी तीसरे देश में भेजने जैसे संवेदनशील मुद्दे शामिल हैं। हालांकि कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर अब भी दोनों पक्षों के बीच सहमति बनना बाकी है।

ईरान पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों में राहत को लेकर सबसे अधिक मतभेद बने हुए हैं। माना जा रहा है कि यही मुद्दा वार्ता प्रक्रिया में सबसे बड़ी बाधा साबित हो सकता है और समझौते में देरी की मुख्य वजह भी बन सकता है।

यह पूरा घटनाक्रम फरवरी के अंत में अमेरिका और इज़रायल द्वारा ईरान पर किए गए सैन्य हमलों के बाद शुरू हुए तनाव के बीच सामने आया है। जवाबी कार्रवाई में ईरान ने भी हमले किए थे, जिसके बाद वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन गतिविधियां प्रभावित हुई थीं।

इसके बाद पाकिस्तान की मध्यस्थता में आठ अप्रैल को युद्धविराम लागू कराया गया था। 11 अप्रैल को इस्लामाबाद में दोनों पक्षों के बीच पहली दौर की बातचीत हुई थी, लेकिन वह किसी ठोस और स्थायी समझौते तक नहीं पहुंच सकी। बाद में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्धविराम की अवधि को अनिश्चित समय तक बढ़ाने का ऐलान किया था।

राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिकी मीडिया से बातचीत में कहा कि उनकी सरकार को ईरान के जवाब का इंतजार है और उन्हें उम्मीद है कि जल्द प्रतिक्रिया मिल सकती है। वहीं अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी कहा कि वॉशिंगटन को ईरान की ओर से जवाब मिलने की उम्मीद है, हालांकि शनिवार सुबह तक तेहरान की तरफ से किसी औपचारिक प्रतिक्रिया की पुष्टि नहीं हो सकी थी।