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ईरान-इज़राइल युद्ध के 12 दिन बाद, अब ईरान का एक्शन; 3 लोगों को फांसी, 700 से अधिक गिरफ्तार

विदेश डेस्क, ऋषि राज |

ईरान-इज़राइल युद्ध के 12 दिन बाद, अब ईरान का अपने नागरिकों पर एक्शन; 3 लोगों को फांसी, 700 से अधिक गिरफ्तार

ईरान और इज़राइल के बीच बीते दिनों हुए 12 दिवसीय तनाव और सैन्य टकराव के बाद अब ईरान ने अपने ही देश के नागरिकों पर कड़ा रुख अपनाया है। ताज़ा जानकारी के अनुसार, ईरानी सरकार ने तीन लोगों को फांसी पर लटका दिया है और 700 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है।

क्या है मामला?

ईरान का दावा है कि इन गिरफ्तार और फांसी दिए गए लोगों का संबंध:
देश विरोधी गतिविधियों से था,
सरकार विरोधी प्रदर्शनों में संलिप्त थे,
या फिर इज़राइल के समर्थन या जासूसी में शामिल थे।

हालांकि, अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि ईरान लोगों की आवाज़ दबाने और तानाशाही रवैये से असहमति रखने वालों को निशाना बना रहा है।

तीन लोगों को फांसी क्यों दी गई?

इन तीनों लोगों पर देशद्रोह, सुरक्षा से खिलवाड़ और इज़राइल के लिए जासूसी का आरोप था।
एक त्वरित मुकदमे के बाद उन्हें फांसी की सज़ा सुनाई गई और तुरंत कार्रवाई कर दी गई।

इन मामलों में पारदर्शिता की कमी और गुप्त सुनवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

700 से अधिक गिरफ्तारियां

ईरानी गृह मंत्रालय के अनुसार:
हाल ही में ईरान में हुए सरकार विरोधी प्रदर्शनों और युद्ध के खिलाफ प्रदर्शन करने वालों को गिरफ्तार किया गया है।
सोशल मीडिया पर सरकार की आलोचना करने वाले कई पत्रकारों, छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को भी हिरासत में लिया गया है।
इनमें से कई लोगों के परिवारों को अब तक कोई सूचना नहीं दी गई है।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

संयुक्त राष्ट्र, एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वॉच जैसे संगठनों ने ईरान के इस रवैये की कड़ी आलोचना की है।
उनका कहना है कि सरकार युद्ध के बहाने मानवाधिकारों का उल्लंघन कर रही है।

अमेरिका और यूरोपीय संघ ने भी ईरान से मानवाधिकारों का सम्मान करने और नागरिक स्वतंत्रता को बहाल करने की मांग की है।

ईरान और इज़राइल के बीच हाल में सैन्य संघर्ष हुआ था जिसमें दोनों देशों के बीच मिसाइल और ड्रोन हमले हुए। इस युद्ध में कई नागरिक मारे गए और दोनों देशों में व्यापक तनाव फैल गया।

ईरान का आरोप है कि इज़राइल ने उसकी सुरक्षा एजेंसियों और वैज्ञानिकों को निशाना बनाया, वहीं इज़राइल का कहना है कि वह ईरान की परमाणु गतिविधियों को लेकर सतर्क है।

ईरान ने युद्ध के बाद अपने देश के भीतर कठोर दमन नीति अपनाते हुए फांसी और गिरफ्तारियों का सहारा लिया है। यह स्थिति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानवाधिकार संकट की ओर इशारा कर रही है और आने वाले दिनों में इस पर अंतरराष्ट्रीय दबाव और कूटनीतिक प्रतिक्रिया और तेज़ हो सकती है।