विदेश डेस्क, आर्या कुमारी।
वाशिंगटन, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने दावा किया है कि ईरान के खिलाफ लागू समुद्री नाकाबंदी अभियान के तहत 100 वाणिज्यिक जहाजों के मार्ग को बदलने का महत्वपूर्ण लक्ष्य हासिल कर लिया गया है। इस कदम को ईरान पर आर्थिक और रणनीतिक दबाव बढ़ाने की दिशा में अमेरिका की बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है।
सेंटकॉम के अनुसार, यह समुद्री अभियान ईरान के महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों और बंदरगाहों तक पहुंच को प्रभावित करने के उद्देश्य से संचालित किया जा रहा है। अमेरिकी सेना का कहना है कि नाकाबंदी के कारण कई व्यापारिक जहाजों को अपने निर्धारित मार्ग बदलने पड़े हैं, जिससे क्षेत्रीय समुद्री व्यापार पर भी असर पड़ रहा है।
अमेरिका ने यह समुद्री नाकाबंदी 13 अप्रैल से लागू की थी। यह कदम उस स्थिति के बाद उठाया गया, जब ईरान से जुड़े रणनीतिक समुद्री गलियारे और क्षेत्रीय गतिविधियों को लेकर तनाव बढ़ा। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य ईरान के समुद्री व्यापार नेटवर्क को सीमित करना और उस पर आर्थिक दबाव को और मजबूत करना है।
सेंटकॉम के मुताबिक, इस कार्रवाई के तहत उन सभी वाणिज्यिक जहाजों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है, जो ईरानी बंदरगाहों की ओर जा रहे हैं या वहां से बाहर निकल रहे हैं। अमेरिकी नौसेना ऐसे जहाजों की आवाजाही को बाधित करने की रणनीति पर काम कर रही है, जिससे ईरान की आर्थिक गतिविधियों पर प्रभाव डाला जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि समुद्री मार्गों में बदलाव का असर वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर भी पड़ सकता है, क्योंकि क्षेत्र का समुद्री गलियारा अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। खासतौर पर तेल और ऊर्जा परिवहन के संदर्भ में यह इलाका वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अहम भूमिका निभाता है।
इस बीच, क्षेत्र में बढ़ते तनाव ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता भी बढ़ाई है। विश्लेषकों का कहना है कि समुद्री नाकाबंदी और व्यापारिक जहाजों के मार्गों में बदलाव जैसे कदम आने वाले समय में पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थिति को और अधिक संवेदनशील बना सकते हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रणनीतिक और आर्थिक प्रभाव छोड़ सकता है।







