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एम्बुलेंस न मिलने से ठेले पर पत्नी की मौत, सिस्टम पर सवाल

स्टेट डेस्क, प्रीति पायल |

मध्य प्रदेश के सागर जिले में एक गरीब सब्जी बेचने वाले बुजुर्ग पवन साहू की पत्नी पार्वती साहू की अचानक तबीयत खराब हो गई। शनिवार सुबह उनकी हालत गंभीर होने पर पवन ने एम्बुलेंस बुलाने का प्रयास किया, लेकिन एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं हुई। कुछ खबरों के अनुसार, उन्हें एम्बुलेंस कॉल करना नहीं आता था या फोन करने पर भी कोई इंतजाम नहीं हो सका। पड़ोसियों से हाथ जोड़कर मदद मांगी, लेकिन किसी ने सहयोग नहीं किया ना एम्बुलेंस बुलाई, न कोई वाहन उपलब्ध कराया।

मजबूरी में पवन ने अपनी आजीविका का साधन यानी सब्जी का हाथ ठेला ही इस्तेमाल किया। उन्होंने पत्नी को ठेले पर लिटाया और अस्पताल की दिशा में खींचने लगे। रास्ते में माता मढ़िया के निकट पहुंचते ही पार्वती साहू की सांसें थम गईं। अस्पताल पहुंचने से पूर्व ही उनकी मृत्यु हो चुकी थी।

पवन बिल्कुल टूट गए वे सड़क किनारे ठेले के पास बैठकर फूट-फूटकर रोने लगे। यह हृदयविदारक दृश्य वायरल वीडियो और तस्वीरों के जरिए सोशल मीडिया पर फैल गया। बाद में पवन ने उसी ठेले पर पत्नी के शव को रखा और लगभग 4 किलोमीटर दूर मुक्तिधाम (श्मशान घाट) तक खींच ले गए। अंतिम संस्कार के लिए धन की कमी थी, तब एक पूर्व पार्षद ने सहायता प्रदान की।

सागर शहर, जो 'स्मार्ट सिटी' का दर्जा रखता है, वहां भी ऐसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव उजागर हुआ। कई न्यूज चैनलों ने इसे कवर किया। वीडियो में पति का रोता हुआ चेहरा और ठेले पर शव देखकर लोग गहराई से भावुक हो उठे। यह घटना केवल एक परिवार की विपत्ति नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की कमियों, गरीबी और संवेदनहीनता का प्रतीक बन चुकी है।