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कुलपति प्रो. मुरलीमनोहर पाठक के नेतृत्व में विश्व रक्तदान दिवस आयोजित

स्टेट डेस्क, आकाश अस्थाना।

  • मंच पर कुलपति प्रोफेसर मुरलीमनोहर पाठक, प्रोफेसर भागीरथी नंदा, प्रोफेसर परमानंद भारद्वाज तथा प्रभारी कुलसचिव एवं वित्त अधिकारी श्री संतोष श्रीवास्तव उपस्थित रहे।

नई दिल्ली : स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के निर्देशानुसार श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली में विश्व रक्तदान दिवस के अवसर पर एक अत्यंत गरिमामय, प्रेरणादायी एवं जन-जागरूकता से परिपूर्ण कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। यह आयोजन मानवता, सेवा-भाव एवं सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति विश्वविद्यालय की दृढ़ प्रतिबद्धता का सशक्त एवं प्रेरक प्रतीक बनकर उभरा।वर्तमान समय में जब चिकित्सा आपात स्थितियों में रक्त की निरंतर एवं तात्कालिक आवश्यकता बनी रहती है, तब रक्तदान जैसे पुनीत कार्य के प्रति जन-जागरूकता का यह प्रयास अत्यंत प्रासंगिक एवं अनुकरणीय सिद्ध हुआ। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय परिवार के समस्त अकादमिक एवं गैर-अकादमिक कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए रक्तदान के महत्व को आत्मसात करने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम के दौरान कुलपति प्रो. मुरलीमनोहर पाठक ने विश्वविद्यालय के सभी उपस्थित अकादमिक एवं गैर-अकादमिक कर्मचारियों को नियमित रक्तदान करने की शपथ दिलाई। उन्होंने स्वयं भी नियमित रक्तदान को अपने जीवन का अभिन्न अंग बताते हुए इसे “जीवनदान” की सर्वोच्च मानवीय अभिव्यक्ति निरूपित किया। उन्होंने कहा कि रक्तदान वह निःस्वार्थ सेवा है, जो किसी अनजान व्यक्ति के जीवन में आशा, विश्वास और नवजीवन का संचार करती है।अपने प्रेरणास्पद उद्बोधन में कुलपति महोदय ने समाज में रक्तदान के प्रति व्याप्त भ्रांतियों एवं संकोच की प्रवृत्ति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह आवश्यकता है कि इसे एक सामाजिक आंदोलन के रूप में और अधिक व्यापक बनाया जाए। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि जहाँ कुछ क्षेत्रों में अभी भी जागरूकता की कमी है, वहीं अनेक स्थानों पर यह मानवीय सेवा का सशक्त जन-आंदोलन बन चुका है।कुलपति प्रो. पाठक के ओजस्वी उद्बोधन एवं शपथ ग्रहण कार्यक्रम ने समूचे सभागार में सेवा, समर्पण एवं सामाजिक उत्तरदायित्व की एक नई चेतना का संचार किया।कार्यक्रम के मुख्य वक्ता विश्वविद्यालय के चिकित्सा अधिकारी डॉ. के.एल. ठाकुर ने रक्तदान के वैज्ञानिक, चिकित्सकीय एवं सामाजिक महत्व पर विस्तृत प्रकाश डालते हुए कहा कि रक्त का कोई कृत्रिम विकल्प उपलब्ध नहीं है, अतः स्वैच्छिक रक्तदान ही जीवन रक्षा का एकमात्र एवं सर्वाधिक प्रभावी माध्यम है। उन्होंने रक्तदान से जुड़ी विभिन्न भ्रांतियों का तथ्यपरक एवं वैज्ञानिक निराकरण करते हुए इसे पूर्णतः सुरक्षित, सरल एवं स्वास्थ्यवर्धक प्रक्रिया बताया।प्रभारी कुलसचिव एवं वित्ताधिकारी श्री संतोष श्रीवास्तव ने रक्तदान को “मानवता का मौन किंतु सर्वाधिक प्रभावशाली दान” निरूपित करते हुए इसे सामाजिक उत्तरदायित्व का अनिवार्य अंग बताया।

उन्होंने सभी प्रतिभागियों से इसे जीवनशैली का नियमित हिस्सा बनाने का आह्वान किया।इस अवसर पर अकादमिक अधिष्ठाता प्रो. भागीरथी नंदा तथा प्रो. परमानंद भारद्वाज की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम की शैक्षणिक एवं बौद्धिक उत्कृष्टता को और अधिक प्रतिष्ठित एवं प्रभावशाली बनाया।कार्यक्रम के समापन सत्र में छात्र कल्याण संकाय प्रमुख प्रोफेसर  मार्कण्डेय नाथ तिवारी ने सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं प्रतिभागियों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए आयोजन की सफलता का श्रेय विश्वविद्यालय परिवार की सामूहिक प्रतिबद्धता, अनुशासन एवं सक्रिय सहभागिता को दिया।समग्र कार्यक्रम में शिक्षकों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों की उत्साहपूर्ण एवं अनुकरणीय भागीदारी ने इसे मात्र एक औपचारिक आयोजन न रहने देकर मानवता एवं सामाजिक सरोकारों से ओतप्रोत एक व्यापक जन-जागरूकता अभियान का स्वरूप प्रदान किया।अंततः यह आयोजन इस संकल्प के साथ संपन्न हुआ कि रक्तदान केवल एक दान नहीं, बल्कि जीवनरक्षा का वह महान संकल्प है जो समाज को अधिक संवेदनशील, जागरूक एवं मानवीय बनाता है।