नेशनल डेस्क, आर्या कुमारी।
कोटा : लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बुधवार को यहां आयोजित ‘छात्रों की गूंज महारैली’ में शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं और रोजगार से जुड़े मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना की। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हजारों छात्रों और उनके अभिभावकों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान शिक्षा व्यवस्था युवाओं के सपनों को साकार करने के बजाय उन पर आर्थिक दबाव बढ़ाने का काम कर रही है।
करीब एक घंटे तक चले संवाद कार्यक्रम में राहुल गांधी ने कहा कि यह आयोजन पूरी तरह गैर-राजनीतिक था और इसका उद्देश्य छात्रों की समस्याओं, चुनौतियों तथा भविष्य को लेकर उनकी चिंताओं को समझना और उन पर चर्चा करना था। उन्होंने कहा कि देश की शिक्षा प्रणाली को इस तरह विकसित किया जाना चाहिए कि वह युवाओं को उनकी क्षमता और रुचि के अनुरूप अवसर उपलब्ध करा सके।
उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा व्यवस्था रोजगार सृजन की जरूरतों के अनुरूप नहीं है और बड़ी संख्या में युवा शिक्षा पूरी करने के बाद भी उपयुक्त रोजगार पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उनके अनुसार, शिक्षा और रोजगार के बीच बढ़ती खाई युवाओं के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बन गई है, जिस पर गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है।
राहुल गांधी ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में छात्रों और उनके परिवारों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि देशभर में लाखों विद्यार्थी विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी पर भारी राशि खर्च करते हैं। उनके अनुसार, केवल नीट परीक्षा की तैयारी में ही परिवारों द्वारा किया जाने वाला कुल व्यय शिक्षा मंत्रालय के वार्षिक बजट के बराबर पहुंच जाता है। उन्होंने कहा कि नीट, जेईई, यूपीएससी, एसएससी और आरआरबी जैसी प्रमुख परीक्षाओं की तैयारी पर होने वाला कुल खर्च कई मंत्रालयों के संयुक्त बजट के समकक्ष है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के बजाय निजी शिक्षा संस्थानों और कोचिंग उद्योग को बढ़ावा मिला है। उनका कहना था कि महंगे स्कूलों, कॉलेजों और कोचिंग संस्थानों पर बड़ी रकम खर्च करने के बावजूद युवाओं को रोजगार की कोई निश्चित गारंटी नहीं मिलती। उन्होंने दावा किया कि बड़ी संख्या में तकनीकी शिक्षा प्राप्त युवा भी बेरोजगारी की समस्या का सामना कर रहे हैं।
अपने संबोधन के दौरान राहुल गांधी ने नीट अभ्यर्थी आकांक्षा की आत्महत्या का उल्लेख करते हुए इसे शिक्षा व्यवस्था की गंभीर विफलता बताया। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं केवल व्यक्तिगत त्रासदी नहीं हैं, बल्कि उस प्रणाली पर भी सवाल खड़े करती हैं, जो छात्रों पर लगातार बढ़ता दबाव डालती है। उनका कहना था कि वर्तमान शिक्षा तंत्र चयन से अधिक अस्वीकृति की व्यवस्था बनकर रह गया है।
राहुल गांधी ने छात्रों से शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए अपने सुझाव देने और बदलाव की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि देश का भविष्य उसके युवाओं पर निर्भर करता है और ऐसी शिक्षा व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए, जिसमें छात्रों पर आर्थिक बोझ कम हो तथा उन्हें अपने सपनों और करियर के लक्ष्यों को हासिल करने के बेहतर अवसर मिल सकें। कार्यक्रम के दौरान मौजूद छात्रों ने उनके समर्थन में नारे लगाए, हालांकि उन्होंने संवाद और विचार-विमर्श को प्राथमिकता देने की अपील की।







