स्टेट डेस्क, श्रेया पाण्डेय |
पटना: जिला एवं सत्र अदालत ने मंगलवार को देश के जाने-माने शिक्षक फैसल खान, जिन्हें लोग प्यार से 'खान सर' कहते हैं, को एक बड़ी कानूनी राहत दी है। कोर्ट ने उनके कोचिंग संस्थान 'खान ग्लोबल स्टडीज' (KGS) के बाहर हुई गोलीबारी और तोड़फोड़ के मामले में उनकी अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए उनकी गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी है।
अदालत के इस आदेश के बाद पुलिस फिलहाल खान सर के खिलाफ कोई भी दंडात्मक या दबावपूर्ण कार्रवाई नहीं कर सकती है और इस चरण में उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जा सकेगा। हालांकि, अदालत ने यह भी साफ किया है कि पुलिस इस मामले की जांच जारी रख सकती है और खान सर से पूछताछ करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है।
यह पूरा विवाद इस महीने की शुरुआत में 2 जून की रात को शुरू हुआ था, जब पटना के कदमकुआं थाना क्षेत्र के मुसल्लहपुर हाट इलाके में स्थित खान सर के कोचिंग संस्थान पर 15 से 20 असामाजिक तत्वों ने हमला कर दिया था। हमलावरों ने कोचिंग सेंटर के दफ्तर में जमकर तोड़फोड़ की, बैनर-पोस्टर फाड़ दिए और वहां तैनात सुरक्षाकर्मियों के साथ मारपीट की, जिसमें एक गार्ड के सिर पर गंभीर चोट आई थी। इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसमें खान सर के दो निजी सुरक्षा गार्ड हवा में गोलियां चलाते हुए दिखाई दे रहे थे। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों गार्डों को हिरासत में लिया और उनके पास से लाइसेंसी हथियार जब्त कर उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
मामले ने तब एक नया मोड़ ले लिया जब गिरफ्तार सुरक्षा गार्डों ने पुलिस पूछताछ में कथित तौर पर यह बयान दिया कि उन्होंने हवा में फायरिंग खान सर के निर्देश पर ही की थी। गार्ड्स के इस बयान के बाद पटना पुलिस ने कदमकुआं थाने में दर्ज प्राथमिकी (FIR) में खान सर को भी नामजद आरोपी बना लिया और उनके खिलाफ हत्या के प्रयास (BNS की धारा 109) और आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया। गिरफ्तारी की तलवार लटकती देख खान सर के वकील अरविंद कुमार महुआड़ ने सोमवार को पटना कोर्ट में अग्रिम जमानत की अर्जी दाखिल की थी, जिस पर मंगलवार को सुनवाई हुई।
अदालत में सुनवाई के दौरान खान सर के वकील ने दलील दी कि उनका इस घटना में कोई सीधा आपराधिक हाथ नहीं है और उन्हें इस मामले में झूठा फंसाया जा रहा है। बचाव पक्ष ने कहा कि खान सर न तो मौके पर मौजूद थे और न ही किसी आपराधिक साजिश का हिस्सा थे। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि हमलावरों द्वारा किए गए हिंसक हमले के दौरान सुरक्षा गार्डों ने केवल आत्मरक्षा (Self-defence) में हवा में गोलियां चलाई थीं, न कि किसी को नुकसान पहुंचाने के लिए। वहीं दूसरी ओर, पुलिस ने कोर्ट के सामने केस डायरी और अब तक की जांच के सबूत पेश किए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जिला जज ने खान सर को अगली सुनवाई तक अंतरिम सुरक्षा प्रदान कर दी।
इस विवाद के पीछे पटना के कोचिंग संस्थानों के बीच की आपसी प्रतिद्वंद्विता (Coaching Rivalry) को मुख्य वजह माना जा रहा है। घटना के तुरंत बाद खान सर ने आरोप लगाया था कि एक प्रतिद्वंद्वी कोचिंग संस्थान के लोग उनके कम फीस मॉडल और रिकॉर्ड सफलताओं से जलते हैं, इसलिए उन्होंने यह हमला करवाया। पुलिस ने इस मामले में 'ज्ञान बिंदु कोचिंग सेंटर' के निदेशक रोशन आनंद समेत कुछ अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया है। हालांकि, प्रतिद्वंद्वी संस्थान के समर्थकों का कहना है कि यह पूरा नाटक खान सर द्वारा खुद रचा गया था। इस बढ़ती प्रतिद्वंद्विता को देखते हुए बिहार के शिक्षा मंत्री मिथलेश तिवारी ने भी बयान दिया है कि सरकार जल्द ही कोचिंग संस्थानों के विवादों को रोकने के लिए एक नीति तैयार करेगी। फिलहाल, कोर्ट के इस फैसले से खान सर और उनके लाखों छात्रों ने राहत की सांस ली है, लेकिन पुलिस की तफ्तीश अभी भी जारी है।







