Ad Image
Ad Image
ट्रंप ने कहा, खाड़ी देशों की अपील पर ईरान पर हमले बंद किए गए || अदाणी समूह को अमेरिका से क्लीनचिट, आपराधिक मामलों में राहत || राहुल गांधी ने कहा, देश में बड़ा आर्थिक संकट आने वाला, आम आदमी होगा परेशान || भारत और नार्वे के बीच कुल 9 समझौतों पर हस्ताक्षर, बेहतर सहयोग की पहल: मोदी || अहमदाबाद - मुंबई हाईवे पर दर्दनाक सड़क हादसा, 12 की मौत 25 से ज्यादा घायल || राष्ट्रपति ट्रंप का दावा: समझौते के लिए ईरान बेताब, ईरान का इनकार || Delhi - NCR में सीएनजी फिर महंगा, तीन दिन में तीसरी बार कीमत वृद्धि || PM मोदी का नीदरलैंड दौरा, द्विपक्षीय रिश्ते की बेहतरी पर बल दिया || लन्दन: ब्रिटिश PM कीर स्टारमर दे सकते है इस्तीफा, स्थानीय चुनावों में पार्टी की हार का असर || युद्ध समाप्ति पर ईरान के साथ सकारात्मक बातचीत हुई: राष्ट्रपति ट्रंप

The argument in favor of using filler text goes something like this: If you use any real content in the Consulting Process anytime you reach.

  • img
  • img
  • img
  • img
  • img
  • img

Get In Touch

चीन-कनाडा व्यापार समझौते पर भड़का अमेरिका, 100% टैरिफ की धमकी

विदेश डेस्क, नीतीश कुमार।

नई दिल्ली/वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को कनाडा को चीन के साथ व्यापारिक समझौते को आगे बढ़ाने को लेकर चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि यदि कनाडा ने इस दिशा में कदम बढ़ाया, तो उस पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाएगा। अमेरिकी राष्ट्रपति का मानना है कि कनाडा और चीन के बीच हुआ यह व्यापार समझौता चीन के लिए अपने निर्यात को कनाडा के रास्ते अमेरिका तक पहुंचाने का माध्यम बन सकता है।

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा कि चीन कनाडा को पूरी तरह से निगल जाएगा और उसका सर्वनाश कर देगा। उनके अनुसार इससे कनाडा के कारोबार, सामाजिक संरचना और जीवनशैली को गंभीर नुकसान पहुंचेगा।

हाल ही में कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने बीजिंग का दौरा किया था, जहां एक प्रारंभिक व्यापार समझौते पर सहमति बनी। इस समझौते के तहत कनाडा में बिकने वाली चीनी इलेक्ट्रिक कारों पर टैरिफ में कमी की जाएगी, जबकि इसके बदले चीन ने कनाडा के कृषि उत्पादों पर लगाए गए टैरिफ घटाने पर सहमति जताई है।

कनाडाई उत्पादों पर अत्यधिक टैरिफ लगाए जाने की स्थिति में अमेरिकी आपूर्ति श्रृंखलाओं पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। इसमें रक्षा उत्पादन से जुड़ी आपूर्ति प्रणालियां भी शामिल हैं, क्योंकि पारंपरिक रूप से दोनों देश एक-दूसरे के लिए पुर्जों और सहायक उपकरणों का निर्माण कर अपनी-अपनी आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूती देते रहे हैं।