नेशनल डेस्क, मुस्कान कुमारी।
मां शैलपुत्री पूजा से मिलेगा साहस और शक्ति
नई दिल्ली: चैत्र नवरात्रि 2026 का पावन पर्व आज 19 मार्च, गुरुवार से शुरू हो रहा है। इस पहले दिन भक्त मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की आराधना कर कलश स्थापना करेंगे, जिससे घर में मां दुर्गा का आगमन माना जाता है।
नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा होती है। पहले दिन पर्वतराज हिमालय की पुत्री मां शैलपुत्री को समर्पित है। उनका स्वरूप बेहद शांत और दिव्य माना जाता है। वाहन बैल है। एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे में कमल का फूल शोभित होता है।
भक्तों का विश्वास है कि सच्चे मन से मां शैलपुत्री की पूजा करने वाले को साहस, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। जीवन के दुख-दर्द दूर होते हैं और समृद्धि आती है।
घटस्थापना का शुभ मुहूर्त
कलश स्थापना का मुख्य मुहूर्त सुबह 6:52 बजे से 7:43 बजे तक है। यदि यह समय निकल जाए तो अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:05 बजे से 12:53 बजे तक सबसे उत्तम है। इस दौरान पूजा करने से मां की विशेष कृपा प्राप्त होती है। आज का रंग पीला है, जो पवित्रता और उर्जा का प्रतीक माना जाता है।
पूजा की विधि
सुबह स्नान कर साफ वस्त्र पहनें। पूजा स्थल शुद्ध करें। मिट्टी के पात्र में सप्तधान्य बोकर उसके ऊपर जल भरा कलश रखें। कलश में गंगाजल, सुपारी, सिक्का और आम के पत्ते डालें। ऊपर नारियल रखकर मां शैलपुत्री की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। कुमकुम, अक्षत, सफेद फूल और सफेद वस्त्र अर्पित करें।
मंत्र जाप करें- “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॐ शैलपुत्री देव्यै नमः”। साथ में दुर्गा सप्तशती या दुर्गा चालीसा का पाठ भी किया जा सकता है। पूरे विधि-विधान से पूजा करने वाले भक्तों को मां सुख, शांति और समृद्धि प्रदान करती हैं।
यह पर्व पूरे देश में धूमधाम से मनाया जा रहा है। घर-घर में कलश स्थापना और मां की आरती का सिलसिला शुरू हो गया है। भक्तों में उत्साह देखते ही बनता है।







