विदेश डेस्क, ऋषि राज |
टोक्यो: जापान में संसद के निचले सदन (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) के गठन के लिए आज आम चुनाव हो रहे हैं। कुल 465 सीटों वाले इस सदन के लिए मतदान को लेकर पूरे देश में राजनीतिक सरगर्मी तेज है। चुनाव के नतीजे न केवल जापान की घरेलू राजनीति की दिशा तय करेंगे, बल्कि एशिया और वैश्विक स्तर पर भी इसके असर की संभावना जताई जा रही है।
प्रधानमंत्री साने ताकाइची की लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (एलडीपी) अपने सहयोगी जापान इनोवेशन पार्टी के साथ मिलकर मजबूत बहुमत हासिल करने की कोशिश कर रही है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यदि यह गठबंधन कम से कम 261 सीटें जीत लेता है, तो सरकार को स्थिर बहुमत मिल जाएगा। इससे संसदीय समितियों और नीतिगत फैसलों पर उनका प्रभाव और मजबूत होगा।
इस चुनाव में आर्थिक सुधार, राष्ट्रीय सुरक्षा, तकनीकी विकास और सामाजिक कल्याण जैसे मुद्दे प्रमुख बने हुए हैं। जापान पिछले कुछ समय से आर्थिक चुनौतियों, बढ़ती महंगाई और वैश्विक अस्थिरता का सामना कर रहा है, जिसके चलते मतदाता सरकार की नीतियों को लेकर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। साथ ही, चीन और उत्तर कोरिया से जुड़े सुरक्षा मुद्दे भी चुनावी बहस के केंद्र में हैं।
हालांकि इस बार मतदान प्रक्रिया मौसम की चुनौतियों से भी प्रभावित हो सकती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जापान के उत्तरी और पश्चिमी हिस्सों में भारी बर्फबारी हुई है। 1990 के बाद पहली बार सर्दियों के दौरान इतना बड़ा चुनाव हो रहा है, जिससे मतदान प्रतिशत पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। प्रशासन ने मतदाताओं की सुविधा के लिए विशेष इंतजाम किए हैं, ताकि वे सुरक्षित तरीके से मतदान कर सकें।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस चुनाव के परिणाम जापान की विदेश नीति, आर्थिक रणनीति और क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग को नई दिशा दे सकते हैं। जापान एशिया-प्रशांत क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण शक्ति है, इसलिए वहां की राजनीतिक स्थिरता वैश्विक राजनीति और व्यापारिक समीकरणों पर भी प्रभाव डालती है।
अब सबकी नजर मतदान के बाद आने वाले परिणामों पर टिकी है, जो यह तय करेंगे कि जापान में वर्तमान सरकार सत्ता में बनी रहती है या देश को नई राजनीतिक दिशा मिलती है।







