Ad Image
Ad Image
अमेरिकी और ईरान के बीच प्रारंभिक समझौता, 60 दिन का सीजफायर लागू || अमेरिकी सेंट्रल कमान की घोषणा, ईरान की नाकेबंदी समाप्त || ईरान - अमेरिका में टकराव चरम पर, नए हमलों से सीजफायर पर लग सकता ब्रेक || जापान: तूफान जोंगमी ने मचाई तबाही, 60 हजार से अधिक घरों में बिजली गुल || जयराम रमेश ने लिखा पत्र, ग्रेट निकोबार परियोजना पर पुनर्विचार की अपील || नई दिल्ली के मालवीय नगर स्थित रेस्टोरेंट में आग से 20 की मौत, दर्जनों घायल || ट्रंप ने कहा, खाड़ी देशों की अपील पर ईरान पर हमले बंद किए गए || अदाणी समूह को अमेरिका से क्लीनचिट, आपराधिक मामलों में राहत || राहुल गांधी ने कहा, देश में बड़ा आर्थिक संकट आने वाला, आम आदमी होगा परेशान || भारत और नार्वे के बीच कुल 9 समझौतों पर हस्ताक्षर, बेहतर सहयोग की पहल: मोदी

The argument in favor of using filler text goes something like this: If you use any real content in the Consulting Process anytime you reach.

  • img
  • img
  • img
  • img
  • img
  • img

Get In Touch

जीवन की सच्ची साधना जीना एवं महसूस करना है: बिमल सर्राफ

लोकल डेस्क, ऋषि राज।

रक्सौल: जीवन यात्रा एक सत्य है,उसको सच्चे अर्थों में जीना एवं महसूस करना ही इंसान को महान बनाता है।करुणा, प्रेम और तप की जीवंत प्रतिमूर्ति है इंसानी जीवन की यात्रा। 

उक्त विचार लायंस इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट ( 322 ई ) के जोनल चेयरपर्सन सह डिस्ट्रिक्ट चेयरपर्सन एवं भारत विकास परिषद् , रक्सौल  के सेवा संयोजक सह मीडिया प्रभारी सह सामाजिक कार्यकर्ता बिमल सर्राफ ने प्रेस से साझा किया। जप, तप, ध्यान के नियमित अभ्यास से इंसान के मन में करुणा, प्रेम  और संवेदना की रसधार हिलोरें लेने लगती हैं। उन दिव्य भावों से आप्लावित होने के कारण इंसानी मन प्राणियों की सेवा के लिए मचल उठता है।उन्हीं दिव्य भावों से आप्लावित होने के कारण कई इंसान जीवन भर दीन-दुखियों की सेवा एवं प्राणीमात्र की भलाई में  लगे रहते हैं।बहुत मनुष्य किसी को बिलखता देख कर तत्काल उसकी वेदना मिटाने को आतुर हो जाते एवं किसी को अभावग्रस्त देखते तो स्वयं उसके लिए आवश्यक साधन जुटा देते।उन मनुष्यों के लिए परमार्थ तथा लोक-मंगल- ये ही उनके जीवन की परिभाषा है।ये ही उनके व्यक्तित्व का मूल आधार है, सार है।सचमुच जप,तप,ध्यान,सुमिरन करते रहने के बाद भी बहुत लोगों में करूणा,प्रेम, संवेदना की रसधार नहीं बह रही तब निश्चित ही उनके जप, तप,साधन,सुमिरन में कोई मौलिक दोष व कमी है। सच्ची साधना से इंसान में करूणा,प्रेम, संवेदना वैसे ही फूट पड़ती है जैसे जमीन से पानी का झरना फूट पड़ता है।जो इनको अपनाते,वे सदैव पल-पल आत्मिक सुख ,शांति व आनंद की अनुभूति पाते हैं।उन्हें यह धरा,यह धरती,यह दुनिया स्वर्ग से भी सुंदर दिखती है।यही आत्मदृष्टि है जिससे कोई भी मनुष्य,साधक,संत आदि इस जगत को देखते हैं और अद्वैत की अनुभूति पाते हैं।कोई भी कितना ही पुण्यात्मा अथवा धर्मात्मा हो,अंत में नश्वर शरीर को तो त्यागना ही पड़ता है।लेकिन इस जगत में सर्वश्रेष्ठ लोक पृथ्वी लोक ही है,जहां इंसान ,मानव रहते,स्वर्ग- नरक यहीं है।मानव जीवन लोक-मंगल में निरत रहने के कारण तथा सेवा और परमार्थ का जीवन जीने के कारण ही सर्वश्रेष्ठ है। सभी का कल्याण हो,सभी निरोग रहें,साथ ही सबके दुःखों का निवारण हो।