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ट्रेटा पैक में शराब बिक्री पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

नेशनल डेस्क, मुस्कान सिंह।

नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने ट्रेटा पैक और पाउच जैसे छोटे पैकेटों में शराब की बिक्री को लेकर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने कहा कि इस तरह की पैकेजिंग आम लोगों, खासकर बच्चों और युवाओं के बीच भ्रम की स्थिति पैदा कर सकती है। न्यायालय ने केंद्र सरकार और विभिन्न राज्यों के आबकारी विभागों को नोटिस जारी करते हुए इस मामले में जवाब तलब किया है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि फलों के जूस जैसे दिखने वाले पैकेटों में शराब बेचना बेहद गंभीर विषय है और इससे समाज पर गलत प्रभाव पड़ सकता है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि शराब जैसे संवेदनशील उत्पादों की पैकेजिंग ऐसी नहीं होनी चाहिए, जिससे वह सामान्य पेय पदार्थ या बच्चों के ड्रिंक जैसी दिखाई दे। अदालत ने इस पूरे मामले को सार्वजनिक स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा माना है।

याचिका में दावा किया गया है कि बाजार में बिक रहे कई शराब उत्पादों के पैकेट फलों के रस, एनर्जी ड्रिंक और सॉफ्ट ड्रिंक जैसे दिखाई देते हैं। इन पैकेटों पर आम, सेब और अन्य फलों की तस्वीरें भी छापी जाती हैं, जिससे पहली नजर में यह पहचानना मुश्किल हो जाता है कि उत्पाद शराब है या सामान्य पेय पदार्थ। अदालत ने कहा कि इस तरह की पैकेजिंग लोगों को भ्रमित कर सकती है और बच्चों पर इसका नकारात्मक असर पड़ सकता है।

याचिकाकर्ता संगठन ‘कम्युनिटी अगेंस्ट ड्रंक ड्राइविंग’ की ओर से पेश अधिवक्ता विपिन नायर ने अदालत को बताया कि छोटे और सस्ते पैकेटों में बिक रही शराब युवाओं तक तेजी से पहुंच रही है। उन्होंने कहा कि कम कीमत और आकर्षक पैकेजिंग के कारण यह उत्पाद आम दुकानों तक आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं, जिससे नशे की प्रवृत्ति बढ़ने का खतरा रहता है। याचिका में ऐसे उत्पादों की बिक्री पर सख्त नियंत्रण और स्पष्ट चेतावनी अनिवार्य करने की मांग की गई है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी कहा कि जिस तरह तंबाकू उत्पादों पर स्वास्थ्य संबंधी चेतावनी लिखी जाती है, उसी प्रकार शराब के पैकेटों पर भी बड़े अक्षरों में चेतावनी लिखना जरूरी होना चाहिए। अदालत ने इस बात पर चिंता जताई कि कई उत्पादों पर शराब होने की जानकारी बेहद छोटे अक्षरों में लिखी जाती है, जिससे उपभोक्ताओं को पूरी जानकारी नहीं मिल पाती।

न्यायालय ने केंद्र और राज्य सरकारों से पूछा है कि शराब की पैकेजिंग और बिक्री को लेकर वर्तमान नियम क्या हैं और बच्चों एवं युवाओं को ऐसे उत्पादों से बचाने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं। अदालत ने संकेत दिए कि यदि आवश्यकता पड़ी तो इस मामले में सख्त दिशा-निर्देश भी जारी किए जा सकते हैं।

मामले की अगली सुनवाई में केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और संबंधित विभागों की ओर से जवाब पेश किया जाएगा। माना जा रहा है कि इस सुनवाई के बाद देश में शराब की पैकेजिंग, बिक्री और प्रचार को लेकर नए नियम लागू किए जा सकते हैं। यह मामला सार्वजनिक स्वास्थ्य, युवा सुरक्षा और उपभोक्ता जागरूकता से जुड़े बड़े मुद्दे के रूप में देखा जा रहा है।