Ad Image
Ad Image
ट्रंप ने कहा, खाड़ी देशों की अपील पर ईरान पर हमले बंद किए गए || अदाणी समूह को अमेरिका से क्लीनचिट, आपराधिक मामलों में राहत || राहुल गांधी ने कहा, देश में बड़ा आर्थिक संकट आने वाला, आम आदमी होगा परेशान || भारत और नार्वे के बीच कुल 9 समझौतों पर हस्ताक्षर, बेहतर सहयोग की पहल: मोदी || अहमदाबाद - मुंबई हाईवे पर दर्दनाक सड़क हादसा, 12 की मौत 25 से ज्यादा घायल || राष्ट्रपति ट्रंप का दावा: समझौते के लिए ईरान बेताब, ईरान का इनकार || Delhi - NCR में सीएनजी फिर महंगा, तीन दिन में तीसरी बार कीमत वृद्धि || PM मोदी का नीदरलैंड दौरा, द्विपक्षीय रिश्ते की बेहतरी पर बल दिया || लन्दन: ब्रिटिश PM कीर स्टारमर दे सकते है इस्तीफा, स्थानीय चुनावों में पार्टी की हार का असर || युद्ध समाप्ति पर ईरान के साथ सकारात्मक बातचीत हुई: राष्ट्रपति ट्रंप

The argument in favor of using filler text goes something like this: If you use any real content in the Consulting Process anytime you reach.

  • img
  • img
  • img
  • img
  • img
  • img

Get In Touch

“डिग्री नहीं तो कंटेंट नहीं: चीन ने फर्जी फाइनेंस गुरुओं पर कसा शिकंजा”

विदेश डेस्क : वेरॉनिका राय

बिना योग्यता अब नहीं बन सकते एक्सपर्ट, नियम तोड़ने पर भारी जुर्माना और अकाउंट डिलीट

चीन ने सोशल मीडिया पर फैल रही गलत जानकारी को रोकने के लिए एक बड़ा और सख्त कदम उठाया है। अक्टूबर 2025 में चीन की इंटरनेट रेगुलेटर संस्था Cyberspace Administration of China ने नए नियम लागू किए हैं, जिनका असर सीधे इंफ्लुएंसर और कंटेंट क्रिएटर्स पर पड़ेगा।

अब अगर कोई व्यक्ति फाइनेंस, मेडिसिन, शिक्षा या कानून जैसे संवेदनशील विषयों पर वीडियो या पोस्ट बनाना चाहता है, तो उसके पास संबंधित क्षेत्र की डिग्री या सर्टिफिकेट होना जरूरी होगा। आसान शब्दों में कहें तो “नो डिग्री, नो प्लेटफॉर्म” का नियम लागू हो गया है।

ये नियम Douyin, Bilibili और Weibo जैसे बड़े प्लेटफॉर्म्स पर लागू होंगे। अब इन प्लेटफॉर्म्स को यह सुनिश्चित करना होगा कि कोई भी क्रिएटर अपनी योग्यता साबित किए बिना इस तरह का कंटेंट पोस्ट न कर सके।

सिर्फ यही नहीं, क्रिएटर्स को अपने वीडियो में इस्तेमाल किए गए डेटा या रिसर्च का स्रोत भी बताना होगा। अगर कोई AI से बना कंटेंट है, तो उसे साफ तौर पर लेबल करना जरूरी होगा। यह कदम दर्शकों को सही और पारदर्शी जानकारी देने के लिए उठाया गया है।

अगर कोई इन नियमों का पालन नहीं करता, तो उसे 100,000 युआन (लगभग 14,000 डॉलर) तक का भारी जुर्माना देना पड़ सकता है। इसके अलावा, उसका अकाउंट सस्पेंड या हमेशा के लिए डिलीट भी किया जा सकता है।

नए नियमों में एक और खास बात यह है कि अब हेल्थ प्रोडक्ट्स, सप्लीमेंट्स या दवाइयों का प्रमोशन “शैक्षणिक सलाह” के रूप में नहीं किया जा सकेगा। इससे छिपे हुए विज्ञापनों पर रोक लगाने की कोशिश की जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इंटरनेट पर कोई भी व्यक्ति खुद को एक्सपर्ट बताकर लोगों को गुमराह कर सकता है, जिससे नुकसान भी हो सकता है। ऐसे में चीन का यह कदम इंफ्लुएंसर इंडस्ट्री को अधिक जिम्मेदार और प्रोफेशनल बनाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है।

हालांकि, कुछ लोग इसे सेंसरशिप मानते हैं, जबकि अन्य इसे जवाबदेही बढ़ाने वाला कदम बता रहे हैं। जो भी हो, इतना तय है कि चीन में अब सोशल मीडिया का खेल पूरी तरह बदलने वाला है।