स्टेट डेस्क - वेरॉनिका राय
पटना: जनशक्ति जनता दल (JJD) के अध्यक्ष तेज प्रताप यादव की गिरफ्तारी के बाद बिहार की राजनीति गरमा गई है। NEET परीक्षा को लेकर हुए प्रदर्शन और 'बिहार बंद' के दौरान हिंसा भड़काने के आरोप में पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में बेऊर जेल भेज दिया है। इस कार्रवाई को लेकर उनके वकील और पार्टी नेताओं ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
बताया जा रहा है कि तेज प्रताप यादव को 25 जुलाई की शाम करीब 7:30 बजे पटना के सिटी सेंटर मॉल से हिरासत में लिया गया। उनके वकील का आरोप है कि गिरफ्तारी के समय न तो उन्हें और न ही उनके परिजनों को गिरफ्तारी की वजह बताई गई।
वकील जगन्नाथ सिंह के अनुसार, पुलिस ने यह भी स्पष्ट नहीं किया कि तेज प्रताप पर किन धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। उनका कहना है कि थाने पहुंचने पर पुलिस ने FIR की कॉपी उपलब्ध नहीं कराई और देर रात बिना उसकी प्रति दिए ही उन्हें मजिस्ट्रेट के सामने पेश कर जेल भेज दिया गया।
पुलिस ने तेज प्रताप यादव पर गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है। आरोप है कि बिहार बंद के दौरान रामगुलाम चौक पर प्रदर्शन के समय उन्होंने छात्रों को हिंसा के लिए उकसाया। हालांकि, बचाव पक्ष इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बता रहा है।
JJD की नेता वीणा मानवी ने भी पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पिछले कई दिनों से पार्टी नेताओं को लगातार परेशान किया जा रहा है। उनके अनुसार, यदि छात्रों के समर्थन में आवाज उठाना अपराध है, तो यह लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर पुलिस को कार्रवाई करनी ही थी, तो प्रदर्शन स्थल से ही करनी चाहिए थी।
फिलहाल इस मामले में पुलिस और प्रशासन की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान का इंतजार है। वहीं, तेज प्रताप यादव की गिरफ्तारी को लेकर बिहार की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।







