Ad Image
Ad Image
अमेरिकी और ईरान के बीच प्रारंभिक समझौता, 60 दिन का सीजफायर लागू || अमेरिकी सेंट्रल कमान की घोषणा, ईरान की नाकेबंदी समाप्त || ईरान - अमेरिका में टकराव चरम पर, नए हमलों से सीजफायर पर लग सकता ब्रेक || जापान: तूफान जोंगमी ने मचाई तबाही, 60 हजार से अधिक घरों में बिजली गुल || जयराम रमेश ने लिखा पत्र, ग्रेट निकोबार परियोजना पर पुनर्विचार की अपील || नई दिल्ली के मालवीय नगर स्थित रेस्टोरेंट में आग से 20 की मौत, दर्जनों घायल || ट्रंप ने कहा, खाड़ी देशों की अपील पर ईरान पर हमले बंद किए गए || अदाणी समूह को अमेरिका से क्लीनचिट, आपराधिक मामलों में राहत || राहुल गांधी ने कहा, देश में बड़ा आर्थिक संकट आने वाला, आम आदमी होगा परेशान || भारत और नार्वे के बीच कुल 9 समझौतों पर हस्ताक्षर, बेहतर सहयोग की पहल: मोदी

The argument in favor of using filler text goes something like this: If you use any real content in the Consulting Process anytime you reach.

  • img
  • img
  • img
  • img
  • img
  • img

Get In Touch

दक्षिण कोरिया में राजनाथ सिंह ने भारतीय युद्ध स्मारक का उद्घाटन किया

विदेश डेस्क, आर्या कुमारी।

सियोल, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को दक्षिण कोरिया के पूर्व सैनिक मामलों के मंत्री क्वोन ओह-यूल के साथ इमजिंगाक पार्क में स्थापित भारतीय युद्ध स्मारक का संयुक्त रूप से उद्घाटन किया। यह समारोह कोरियाई युद्ध की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित स्मृति कार्यक्रमों का हिस्सा था। श्री सिंह इस समय दो दिवसीय दक्षिण कोरिया यात्रा पर हैं, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के रणनीतिक और रक्षा सहयोग को और मजबूत करना है।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, नवस्थापित स्मारक भारतीय सेना की 60 पैरा फील्ड एम्बुलेंस इकाई और कस्टोडियन फोर्स ऑफ इंडिया द्वारा कोरियाई युद्ध के दौरान निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका, साहस, बलिदान और मानवीय सेवा को समर्पित है। युद्ध के कठिन दौर में भारतीय सैनिकों ने केवल सैन्य दायित्वों का निर्वहन ही नहीं किया, बल्कि घायल सैनिकों और नागरिकों को राहत पहुंचाने में भी असाधारण योगदान दिया था।

समारोह के दौरान दोनों नेताओं ने स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर उन भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि दी, जिनकी सेवाओं को दक्षिण कोरिया में आज भी सम्मान और कृतज्ञता के साथ याद किया जाता है। इस अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि कोरियाई प्रायद्वीप में शांति स्थापना और मानवीय सहायता के क्षेत्र में भारत का योगदान दोनों देशों के संबंधों की एक महत्वपूर्ण और स्थायी विरासत के रूप में देखा जाता है। उन्होंने कहा कि साझा इतिहास, त्याग और सहयोग भारत तथा कोरिया गणराज्य के बीच विशेष सामरिक साझेदारी को मजबूती प्रदान करते हैं।

 सिंह ने यह भी कहा कि भारतीय सैनिकों की ऐतिहासिक भूमिका को स्मरण करना दोनों देशों की जनता के बीच आपसी समझ और विश्वास को बढ़ाने में सहायक होगा। साथ ही इससे भारत और दक्षिण कोरिया के लंबे समय से चले आ रहे संबंधों को नई पीढ़ियों के सामने फिर से स्थापित करने का अवसर मिलेगा। उन्होंने स्मारक निर्माण में सहयोग देने के लिए दक्षिण कोरिया सरकार, विशेष रूप से पूर्व सैनिक मामलों के मंत्रालय के प्रति भारत की ओर से आभार व्यक्त किया।

दक्षिण कोरिया के पूर्व सैनिक मामलों के मंत्री क्वोन ओह-यूल ने कोरियाई युद्ध के दौरान भारत की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि भारतीय सैनिकों द्वारा दिखाई गई मानवता, साहस और सेवा भावना ने दोनों देशों के बीच स्थायी मित्रता की नींव तैयार की है। उन्होंने कहा कि युद्ध के कठिन समय में भारत द्वारा दिया गया योगदान आज भी कोरियाई समाज में सम्मान के साथ याद किया जाता है।

इस अवसर पर दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर भी हस्ताक्षर किए, जिसका उद्देश्य कोरियाई युद्ध के पूर्व सैनिकों के सम्मान को संरक्षित रखना तथा उनके बीच सहयोग और आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करना है। इसके अतिरिक्त युद्ध में योगदान देने वाले सैनिकों के निस्वार्थ बलिदान और सेवा को समर्पित एक विशेष संस्मरण भी जारी किया गया।

उल्लेखनीय है कि महावीर चक्र से सम्मानित लेफ्टिनेंट कर्नल (डॉ.) ए. जी. रंगराज के नेतृत्व में कार्यरत 60 पैरा फील्ड एम्बुलेंस इकाई ने युद्ध के दौरान अत्यंत प्रतिकूल परिस्थितियों और लगातार गोलाबारी के बीच हजारों घायल सैनिकों और नागरिकों का उपचार किया था। उनकी उत्कृष्ट चिकित्सीय सेवाओं, साहस और मानवीय दृष्टिकोण के कारण कोरिया के लोगों ने उन्हें सम्मानपूर्वक ‘मरून एंजेल्स’ की उपाधि दी थी। भारतीय सैनिकों की यही विरासत आज भी दोनों देशों के संबंधों में सम्मान और विश्वास का महत्वपूर्ण आधार बनी हुई है।