नेशनल डेस्क,श्रेयांश पराशर l
नई दिल्ली। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार की एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम) से जुड़ी नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि इनका सबसे अधिक असर छोटे उद्योगों और पारंपरिक कारीगरों पर पड़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि राजस्थान के बस और ट्रक बॉडी निर्माण उद्योग से जुड़े उद्यमी और कारीगर आज गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर अपनी राजस्थान यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां स्थानीय बस और ट्रक बॉडी बिल्डर्स से मुलाकात के दौरान उन्हें ऐसे मेहनतकश कारीगर मिले, जो अपनी कला और कौशल से रोजगार पैदा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन कारीगरों का हुनर अंतरराष्ट्रीय स्तर की कंपनियों के मानकों के बराबर है, लेकिन उन्हें प्रोत्साहन मिलने के बजाय जटिल नियमों और नीतियों का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा नीतियां छोटे उद्योगों की प्रगति में बाधा बन रही हैं। उनके अनुसार, यदि ऐसे उद्योग बंद होते हैं तो केवल उत्पादन ही प्रभावित नहीं होगा, बल्कि हजारों लोगों की आजीविका और देश की पारंपरिक औद्योगिक क्षमता भी कमजोर पड़ेगी। राहुल गांधी ने कहा कि छोटे उद्योग भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और इन्हें मजबूत करने के लिए सरल नियम, वित्तीय सहायता तथा बेहतर बाजार उपलब्ध कराना आवश्यक है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि उनकी पार्टी छोटे उद्यमियों और कारीगरों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है तथा ऐसे मुद्दों को संसद और जनता के बीच लगातार उठाती रहेगी। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि एमएसएमई क्षेत्र से जुड़े नियमों की समीक्षा कर ऐसी नीतियां बनाई जाएं, जिनसे छोटे उद्योगों को राहत मिले, रोजगार के अवसर बढ़ें और देश का पारंपरिक विनिर्माण क्षेत्र अधिक सशक्त बन सके।







