Ad Image
Ad Image
पप्पू यादव को लेकर पटना पुलिस IGMS पहुंची, स्वास्थ्य जांच की तैयारी || पप्पू यादव ने कहा: साजिश के तहत गिरफ्तारी, जान का है खतरा || पूर्णिया सांसद पप्पू यादव गिरफ्तार, 1995 के मामले में गिरफ्तारी || सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा हेट स्पीच मामले की आज सुनवाई की || लोकसभा से निलंबित सांसदों पर आसन पर कागज फेंकने का आरोप || लोकसभा से कांग्रेस के 7 और माकपा का 1 सांसद निलंबित || पटना: NEET की छात्रा के रेप और हत्या को लेकर सरकार पर जमकर बरसे तेजस्वी || स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, केशव मौर्य को होना चाहिए यूपी का CM || मतदाता दिवस विशेष: मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा 'मतदान राष्ट्रसेवा' || नितिन नबीन बनें भाजपा के पूर्णकालिक राष्ट्रीय अध्यक्ष, डॉ. लक्ष्मण ने की घोषणा

The argument in favor of using filler text goes something like this: If you use any real content in the Consulting Process anytime you reach.

  • img
  • img
  • img
  • img
  • img
  • img

Get In Touch

नरवणे की किताब पर विवाद, प्रकाशक ने सफाई दी

नेशनलडेस्क,श्रेयांश पराशर l

नई दिल्ली : पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज नरवणे की पुस्तक ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ को लेकर चल रहे विवाद के बीच प्रकाशक पेंग्विन रैंडम हाउस इंडिया (पीआरएचआई) ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है। प्रकाशक ने कहा है कि पुस्तक के प्रकाशन अधिकार उसके पास हैं, लेकिन अब तक इसे किसी भी रूप में प्रकाशित नहीं किया गया है।

पीआरएचआई ने अपने आधिकारिक ‘एक्स’ (पूर्व ट्विटर) अकाउंट पर जारी बयान में कहा कि जनरल नरवणे का संस्मरण न तो डिजिटल रूप में और न ही प्रिंट रूप में जनता के लिए जारी किया गया है। प्रकाशक के अनुसार, पुस्तक की कोई बिक्री या वितरण भी नहीं हुआ है। उसने यह भी चेतावनी दी कि किताब का प्रिंट या पीडीएफ स्वरूप साझा करना कॉपीराइट का उल्लंघन होगा और ऐसा करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। प्रकाशक ने कहा कि स्थिति स्पष्ट करने के लिए यह स्पष्टीकरण रिकॉर्ड में रखा जा रहा है।

यह विवाद पिछले सप्ताह तब शुरू हुआ, जब लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपने भाषण में पुस्तक के कुछ हिस्सों का जिक्र किया। उन्होंने इसे ‘प्रिंट से पहले का’ संस्करण बताया। इस पर सत्तापक्ष के सदस्यों ने कड़ा विरोध जताया, जिससे सदन की कार्यवाही के दौरान कई बार व्यवधान भी पैदा हुआ।

हालांकि हंगामे और नारेबाजी के बीच लोकसभा ने अंततः धन्यवाद प्रस्ताव को ध्वनिमत से मंजूरी दे दी। इस बीच, कथित ‘प्रिंट-पूर्व’ संस्करण के अस्तित्व को लेकर उठे सवालों ने मामला और गरमा दिया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और न्यूज़ फोरम पर चल रहे उन दावों पर ध्यान दिया है, जिनमें पुस्तक के कथित प्रिंट-पूर्व संस्करण की उपलब्धता की बात कही गई। पुलिस की विशेष इकाई ने एक मामला दर्ज कर जांच शुरू की है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि मंजूरी से पहले कथित वितरण हुआ या नहीं। अधिकारियों के अनुसार, दावों की सत्यता और संभावित स्रोतों की पड़ताल जारी है।