स्टेट डेस्क, मुस्कान कुमारी।
नई दिल्ली । बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को राज्य विधान परिषद से इस्तीफा दे दिया। यह कदम राज्यसभा में प्रवेश से ठीक पहले उठाया गया है, जिससे बिहार की राजनीति में नया दौर शुरू होने का संकेत मिल रहा है।
नीतीश कुमार, जो बिहार के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रह चुके हैं, अब राष्ट्रीय राजनीति की ओर रुख कर रहे हैं। उनका यह फैसला महज औपचारिकता नहीं, बल्कि बिहार की सत्ता के समीकरण को बदलने वाला माना जा रहा है।
राज्यसभा की लंबी चाहत पूरी
नीतीश कुमार ने 5 मार्च को ही ऐलान किया था कि वे मुख्यमंत्री पद से हटकर राज्यसभा जाएंगे। उन्होंने तब कहा था कि उनका सपना हमेशा से बिहार विधानमंडल और संसद दोनों सदनों में सेवा करने का रहा है। 75 वर्षीय नेता ने हाल ही में नवंबर में NDA की भारी जीत के बाद दसवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। अब विधान परिषद से इस्तीफा देकर वे संसद के ऊपरी सदन में अपना स्थान पक्का कर लेंगे।
इस कदम के साथ बिहार में BJP पहली बार अपना मुख्यमंत्री नियुक्त करने की राह खुल गई है। NDA गठबंधन की जीत के बावजूद नीतीश कुमार अब सक्रिय राज्य राजनीति से दूर हो रहे हैं।
लालू-नीतीश की दशकों पुरानी प्रतिद्वंद्विता का अंत
नीतीश कुमार का यह फैसला उनकी लंबी राजनीतिक यात्रा का एक अहम मोड़ है। दशकों से लालू प्रसाद यादव के साथ उनकी कड़ी प्रतिद्वंद्विता रही। अब लालू सक्रिय राजनीति से दूर हैं और चुनाव लड़ने पर रोक है, जबकि RJD की कमान तेजस्वी यादव संभाल रहे हैं। नीतीश के इस कदम से बिहार की सत्ता की दौड़ में नई संभावनाएं खुली हैं।
रविवार को ही Mokama के विधायक अनंत सिंह ने पुष्टि की थी कि नीतीश कुमार सोमवार को इस्तीफा देंगे। मुख्यमंत्री ने X पर पोस्ट कर लोगों का आभार जताया था। उन्होंने लिखा, “लोगों का विश्वास और समर्थन ही मेरे विकास और गरिमा के एजेंडे को आगे बढ़ाने में सहायक रहा।”
नीतीश कुमार ने आश्वासन दिया है कि बिहार के लोगों से उनका रिश्ता हमेशा बना रहेगा। साथ ही उन्होंने नई सरकार को पूरा सहयोग और मार्गदर्शन देने का वादा भी किया है।
बिहार राजनीति में नया अध्याय
यह बदलाव बिहार की राजनीति में काफी मायने रखता है। Nitish Kumar NDA की जीत के बाद भी मुख्यमंत्री बने रहे थे, लेकिन अब उनका राष्ट्रीय स्तर पर जाना BJP को राज्य में अपना चेहरा साधने का मौका देगा।
वर्तमान में वे अभी भी मुख्यमंत्री हैं, लेकिन विधान परिषद से इस्तीफा देकर राज्यसभा की सदस्यता ग्रहण करने की तैयारी पूरी कर ली है। यह कदम बिहार की स्थिरता और विकास की दिशा को नए सिरे से प्रभावित कर सकता है।







