Ad Image
Ad Image
ईरान - अमेरिका में टकराव चरम पर, नए हमलों से सीजफायर पर लग सकता ब्रेक || जापान: तूफान जोंगमी ने मचाई तबाही, 60 हजार से अधिक घरों में बिजली गुल || जयराम रमेश ने लिखा पत्र, ग्रेट निकोबार परियोजना पर पुनर्विचार की अपील || नई दिल्ली के मालवीय नगर स्थित रेस्टोरेंट में आग से 20 की मौत, दर्जनों घायल || ट्रंप ने कहा, खाड़ी देशों की अपील पर ईरान पर हमले बंद किए गए || अदाणी समूह को अमेरिका से क्लीनचिट, आपराधिक मामलों में राहत || राहुल गांधी ने कहा, देश में बड़ा आर्थिक संकट आने वाला, आम आदमी होगा परेशान || भारत और नार्वे के बीच कुल 9 समझौतों पर हस्ताक्षर, बेहतर सहयोग की पहल: मोदी || अहमदाबाद - मुंबई हाईवे पर दर्दनाक सड़क हादसा, 12 की मौत 25 से ज्यादा घायल || राष्ट्रपति ट्रंप का दावा: समझौते के लिए ईरान बेताब, ईरान का इनकार

The argument in favor of using filler text goes something like this: If you use any real content in the Consulting Process anytime you reach.

  • img
  • img
  • img
  • img
  • img
  • img

Get In Touch

नेतन्याहू-हिजबुल्ला वार्ता के बाद युद्धविराम सहमति: ट्रंप

विदेश डेस्क, ऋषि राज 

वॉशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि इजरायल और हिजबुल्ला के बीच जारी तनाव को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। उन्होंने कहा कि इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और हिजबुल्ला के प्रतिनिधियों के साथ हुई बातचीत के बाद दोनों पक्षों ने युद्धविराम पर सहमति जताई है।

ट्रंप ने सोशल मीडिया मंच पर जारी अपने बयान में कहा कि हाल के दिनों में हुई बातचीत सकारात्मक और रचनात्मक रही। उनके अनुसार इस संवाद के बाद क्षेत्र में नए सैन्य अभियान की संभावना को टालने में सफलता मिली है। उन्होंने यह भी कहा कि जिन सैन्य इकाइयों को संभावित अभियान के लिए तैयार रखा गया था, उन्हें फिलहाल वापस बुला लिया गया है।

हालांकि इस दावे पर अभी तक इजरायल या हिजबुल्ला की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। इसके बावजूद ट्रंप के बयान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा को तेज कर दिया है। पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी तनाव को देखते हुए किसी भी संभावित युद्धविराम को महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धि माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि दोनों पक्ष वास्तव में संघर्ष विराम के लिए सहमत हुए हैं, तो इससे क्षेत्र में स्थिरता बहाल करने की दिशा में सकारात्मक संकेत मिल सकते हैं। पिछले कई महीनों से सीमावर्ती क्षेत्रों में लगातार तनाव और सैन्य गतिविधियों के कारण सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ी हुई थीं।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय लंबे समय से दोनों पक्षों के बीच संवाद और संयम की अपील करता रहा है। संयुक्त राष्ट्र और कई प्रमुख देशों ने भी क्षेत्र में शांति बहाल करने के लिए कूटनीतिक प्रयासों का समर्थन किया है। युद्धविराम की किसी भी पहल से आम नागरिकों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो लगातार संघर्ष के कारण प्रभावित हुए हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यदि यह समझौता स्थायी रूप लेता है तो इससे पूरे पश्चिम एशिया क्षेत्र में तनाव कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही यह भविष्य में व्यापक शांति वार्ता के लिए भी रास्ता खोल सकता है।

फिलहाल दुनिया की नजरें इजरायल, हिजबुल्ला और अमेरिका की अगली आधिकारिक प्रतिक्रियाओं पर टिकी हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट हो सकेगा कि युद्धविराम संबंधी यह दावा व्यवहारिक रूप से कितना सफल साबित होता है और क्षेत्र में शांति स्थापना की दिशा में कितना प्रभाव डालता है।