Ad Image
Ad Image
ट्रंप ने कहा, खाड़ी देशों की अपील पर ईरान पर हमले बंद किए गए || अदाणी समूह को अमेरिका से क्लीनचिट, आपराधिक मामलों में राहत || राहुल गांधी ने कहा, देश में बड़ा आर्थिक संकट आने वाला, आम आदमी होगा परेशान || भारत और नार्वे के बीच कुल 9 समझौतों पर हस्ताक्षर, बेहतर सहयोग की पहल: मोदी || अहमदाबाद - मुंबई हाईवे पर दर्दनाक सड़क हादसा, 12 की मौत 25 से ज्यादा घायल || राष्ट्रपति ट्रंप का दावा: समझौते के लिए ईरान बेताब, ईरान का इनकार || Delhi - NCR में सीएनजी फिर महंगा, तीन दिन में तीसरी बार कीमत वृद्धि || PM मोदी का नीदरलैंड दौरा, द्विपक्षीय रिश्ते की बेहतरी पर बल दिया || लन्दन: ब्रिटिश PM कीर स्टारमर दे सकते है इस्तीफा, स्थानीय चुनावों में पार्टी की हार का असर || युद्ध समाप्ति पर ईरान के साथ सकारात्मक बातचीत हुई: राष्ट्रपति ट्रंप

The argument in favor of using filler text goes something like this: If you use any real content in the Consulting Process anytime you reach.

  • img
  • img
  • img
  • img
  • img
  • img

Get In Touch

न्यायपालिका में ‘भ्रष्टाचार’ संबंधी अध्याय पर SC ने NCERT की पुस्तक पर लगाई रोक

नेशनल डेस्क, आर्या कुमारी ।

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने कक्षा आठ की सामाजिक विज्ञान की National Council of Educational Research and Training (NCERT) की उस पाठ्यपुस्तक के पुनर्मुद्रण और डिजिटल प्रसार पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया है, जिसमें न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से संबंधित संदर्भ दिया गया था। न्यायालय ने देशभर में उपलब्ध पुस्तक की प्रतियों को तत्काल जब्त करने का निर्देश भी जारी किया है और दो सप्ताह के भीतर अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।

अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि इस पुस्तक की जिम्मेदारी एनसीईआरटी के निदेशक तथा उन सभी विद्यालयों के प्रधानाचार्यों की होगी, जहां यह पुस्तक पहुंच चुकी है। विद्यालयों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने परिसर में मौजूद पुस्तक की सभी प्रतियों को तुरंत जब्त कर सील करें।

शीर्ष अदालत यह भी निर्देश दिया कि संबंधित पाठ्यपुस्तक के आधार पर छात्रों को किसी प्रकार की शिक्षा या निर्देश न दिए जाएं। सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने और निर्धारित समय सीमा के भीतर रिपोर्ट भेजने को कहा गया है।

न्यायालय ने चेतावनी दी है कि इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों या बदले हुए शीर्षकों के माध्यम से आदेश का उल्लंघन करने की किसी भी कोशिश को अदालत की अवमानना माना जाएगा और संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।