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पत्रकार सुरक्षा कानून समेत अन्य विषयों को लेकर JJA देगा विधानसभा के समक्ष धरना

नेशनल डेस्क, एन के सिंह।

  • झारखण्ड जर्नलिस्ट एसोसिएशन (JJA) ने सत्ता पक्ष एवं विपक्ष के विधायकों को मांगपत्र सौंपा।

रांची: आज झारखण्ड विधानसभा में भारती श्रमजीवी पत्रकार संघ एवं झारखण्ड जर्नलिस्ट एसोसिएशन के संस्थापक शाहनवाज हसन, आकाश कुमार सोनी, पंकज कुमार, ओमवीर सिंह ने पत्रकारों की लंबित मांगों को लेकर 18 मार्च को प्रस्तावित एक दिवसीय धरना प्रदर्शन में शामिल होने के लिए निमंत्रण सह मांगपत्र पूर्व मुख्यमंत्री सह नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी, विधायक राज सिन्हा, विधायक नवीन जायसवाल, विधायक सरयू राय, विधायक अरूप चटर्जी, विधायक डॉ नीरा यादव, विधायक रागिनी सिंह एवं विधायक पुर्णिमा दास को सौंपा।

ज्ञापन के माध्यम से कहा गया है कि "जब 'लोकतंत्र' शब्द का व्युत्पत्तिगत विश्लेषण किया जाता है, तो इसका सीधा-सा अर्थ है जनता द्वारा शासित शासन प्रणाली। संयुक्त राज्य अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन ने लोकतंत्र की एक लोकप्रिय परिभाषा दी थी, 'जनता की, जनता द्वारा और जनता के लिए सरकार।'मीडिया का काम जनता के संदेश को निष्पक्ष और सटीक रूप से सरकार तक पहुंचाना है। किसी देश की लोकतांत्रिक स्थिति का आकलन आसानी से इस बात से किया जा सकता है कि वहां मीडिया की स्वतंत्रता है या नहीं और आम नागरिक को विचार की स्वतंत्रता प्राप्त है या नहीं। सैकड़ों सीमाओं के बावजूद, लोकतंत्र राजनीतिक संगठन की सबसे स्वीकार्य प्रणाली है।

महोदय, पत्रकारों के लिए जहां देशभर के राज्यों में कई कल्याणकारी योजनाएं चलायी जा रही हैं, वहीं झारखण्ड देश का एक मात्र ऐसा राज्य है, जहां पत्रकारों के लिए राज्य सरकार द्वारा न ही स्वास्थ बीमा योजना लागू की गयी है और न ही पेंशन योजना ही लागू की गयी है। पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर विधानसभा में सत्ता पक्ष एवं विपक्ष के विधायकों द्वारा अनेक बार प्रश्न उठाये गये हैं; उसके बावजूद राज्य सरकार द्वारा इस पर कोई पहल अब तक नहीं की गयी है। झारखण्ड देश का एक मात्र ऐसा राज्य है, जहां सरकार के पास कोरोना से जान गंवानेवालों के कोई आंकड़े नहीं हैं और न ही उनके परिजनों को किसी प्रकार की कोई आर्थिक सहायता प्रदान की गयी है। जहां उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कोविड से जान गंवानेवाले पत्रकारों के परिजनों को दस-दस लाख रुपये दिये गये, वहीं झारखण्ड सरकार ने फूटी कौड़ी नहीं दी।

पत्रकार पेंशन योजना लागू होने के बावजूद झारखंड के सेवानिवृत्त पत्रकारों को अब तक पेंशन की राशि का भुगतान नहीं किया गया। झारखण्ड में पत्रकारों की हत्या एवं झूठे मुकदमों के आंकड़े काफ़ी भयावह हैं। जिन पत्रकारों की हत्याएं हुई हैं, उनमें से मात्र एक दिवंगत पत्रकार चंदन तिवारी की पत्नी को *झारखण्ड जर्नलिस्ट एसोसिएशन* के द्वारा किये गये लम्बे आन्दोलन एवं संघर्ष के उपरांत सरकारी नौकरी प्रदान की गयी। आंचलिक पत्रकारों के विरुद्ध अंचलाधिकारी, प्रखंड विकास पदाधिकारी एवं थाना प्रभारी भ्रष्टाचार से सम्बन्धित खबरें प्रकाशित करने पर झूठे मुकदमों में जेल भेजते आये हैं। ऐसे मामलों में *जादूगोड़ा एवं हजारीबाग के बेकसूर पत्रकारों* को झारखण्ड जर्नलिस्ट एसोसिएशन ने आन्दोलन के उपरांत न्याय मिला, परंतु कई ऐसे पत्रकार हैं, जो आज भी झूठे मुकदमों को झेल रहे हैं।

लोकतांत्रिक मूल्यों का समर्थन करनेवाले सभी राजनीतिक दलों, सांसदों, विधायकों, जन प्रतिनिधियों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं से यह निवेदन है कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की रक्षा के लिए आप सभी झारखण्ड जर्नलिस्ट एसोसिएशन(JJA) द्वारा झारखण्ड विधानसभा के समक्ष 18 मार्च को प्रातः 10:00 बजे* से दिये जानेवाले एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन में शामिल होकर अपना नैतिक समर्थन देने की कृपा करें। लोकतंत्र की रक्षा निष्पक्ष एवं सशक्त मीडिया के बिना संभव नहीं है।