नेशनल डेस्क, आर्या कुमारी।
चेन्नई। भारतीय नौसेना ने अपनी पनडुब्बी-रोधी युद्ध क्षमता को मजबूत करते हुए अत्याधुनिक युद्धपोत INS अंजदीप को औपचारिक रूप से बेड़े में शामिल कर लिया। इस पोत को ‘डॉल्फिन हंटर’ के रूप में विकसित किया गया है, जिसका उद्देश्य समुद्री सुरक्षा, तटीय निगरानी और दुश्मन पनडुब्बियों से मुकाबले की क्षमता को बढ़ाना है।
यह युद्धपोत आठ एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट (ASW-SWC) परियोजना का तीसरा जहाज है। इसे नौसेना प्रमुख Dinesh K. Tripathi ने औपचारिक समारोह में नौसेना के पूर्वी कमान में शामिल किया। इस शामिलीकरण के साथ भारतीय नौसेना की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को और मजबूती मिली है।
नौसेना के अनुसार, यह परियोजना देश में विकसित रक्षा तकनीक और स्वदेशी जहाज निर्माण क्षमता का महत्वपूर्ण उदाहरण है। युद्धपोत को शामिल करना ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
अत्याधुनिक INS अंजदीप का निर्माण Garden Reach Shipbuilders & Engineers (GRSE), कोलकाता द्वारा किया गया है। इसे विशेष रूप से तटीय और उथले समुद्री क्षेत्रों में संचालन के लिए डिजाइन किया गया है, जहां पनडुब्बी रोधी अभियानों और निगरानी की विशेष जरूरत होती है।
भारतीय नौसेना ने कहा कि यह युद्धपोत आधुनिक तकनीक और स्वदेशी डिजाइन का बेहतरीन संयोजन है, जो समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ देश की रक्षा उत्पादन क्षमता में तेजी से हो रही प्रगति को भी दर्शाता है।







