नेशनल डेस्क, श्रेया पाण्डेय |
नई दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भारत के पहले सफल परमाणु परीक्षण 'स्माइलिंग बुद्धा' की 52वीं वर्षगांठ के ऐतिहासिक अवसर पर देश के वैज्ञानिकों और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को याद करते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने इस ऐतिहासिक दिन को भारत की सामरिक संप्रभुता और वैज्ञानिक प्रगति के इतिहास में एक मील का पत्थर बताया। खड़गे ने कहा कि आज से ठीक 52 वर्ष पहले भारत ने दुनिया के सामने अपनी परमाणु क्षमता का लोहा मनवाया था, जिसने वैश्विक स्तर पर देश की छवि और ताकत को हमेशा के लिए बदल कर रख दिया। यह दिन भारत के आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता की यात्रा का एक स्वर्णिम अध्याय है।
सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पहले ट्विटर) पर अपने आधिकारिक हैंडल से एक संदेश साझा करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष ने लिखा कि 52 वर्ष पहले आज ही के दिन यानी 18 मई 1974 को भारत ने 'स्माइलिंग बुद्धा' कोड नाम से अपना पहला भूमिगत परमाणु परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया था। उन्होंने देश के वैज्ञानिकों की सराहना करते हुए कहा कि यह निर्णायक क्षण भारतीय वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं की अद्वितीय प्रतिभा, अटूट समर्पण और अथक परिश्रम का परिणाम था। उन्होंने कहा कि विपरीत परिस्थितियों और सीमित संसाधनों के बावजूद हमारे वैज्ञानिकों ने जो कर दिखाया, उस पर हर भारतीय को हमेशा गर्व रहेगा।
मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपने वक्तव्य में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के साहसिक और दूरदर्शी नेतृत्व की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का यह फैसला केवल एक सैन्य या वैज्ञानिक परीक्षण नहीं था, बल्कि यह एक बेहद मजबूत और दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति का परिचायक था। इस ऐतिहासिक और साहसिक निर्णय ने भारत को आत्मनिर्भरता, रणनीतिक क्षमता और राजनीतिक मजबूती की दिशा में आगे बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त किया था। खड़गे के अनुसार, इंदिरा गांधी का यह अटूट नेतृत्व और वैश्विक दबाव के सामने न झुकने का राजनीतिक साहस आने वाली कई पीढ़ियों को राष्ट्रसेवा के लिए निरंतर प्रेरित करता रहेगा।
उल्लेखनीय है कि 18 मई 1974 को राजस्थान के पोखरण मरुस्थल में भारत ने अपना पहला शांतिपूर्ण परमाणु विस्फोट (Peaceful Nuclear Explosion) किया था। इस पूरे मिशन को बेहद गुप्त तरीके से अंजाम दिया गया था, जिसे 'स्माइलिंग बुद्धा' नाम दिया गया क्योंकि उस दिन बुद्ध पूर्णिमा का पावन अवसर था। इस सफल परीक्षण के साथ ही भारत दुनिया का छठा ऐसा देश बन गया था जिसके पास परमाणु क्षमता थी। खास बात यह थी कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों के बाहर परमाणु शक्ति हासिल करने वाला भारत पहला देश था।
कांग्रेस अध्यक्ष ने अंत में कहा कि पोखरण-1 का यह परीक्षण भारत की शांतिप्रिय नीति और अपनी सीमाओं की रक्षा के मजबूत संकल्प का एक अद्भुत संतुलन था। आज इस ऐतिहासिक घटना के 52 वर्ष पूरे होने पर पूरा देश उन महान वैज्ञानिकों और नेतृत्वकर्ताओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करता है जिन्होंने भारत को वैश्विक पटल पर एक परमाणु संपन्न और शक्तिशाली राष्ट्र के रूप में स्थापित किया।







