विदेश डेस्क, ऋषि राज
बीजिंग: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 19 और 20 मई को चीन की दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर जाएंगे, जहां उनकी मुलाकात चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और अन्य वरिष्ठ नेताओं से होगी। इस यात्रा को वैश्विक कूटनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इस दौरान दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा, व्यापार, ऊर्जा और भू-राजनीतिक मुद्दों पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है।
रूसी राष्ट्रपति कार्यालय के अनुसार, राष्ट्रपति पुतिन चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के निमंत्रण पर चीन पहुंचेंगे। दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय वार्ता में आर्थिक सहयोग, रक्षा संबंध, ऊर्जा आपूर्ति, प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष अनुसंधान और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर बातचीत होगी। इसके अलावा यूक्रेन संघर्ष, एशिया-प्रशांत क्षेत्र की स्थिति और वैश्विक शक्ति संतुलन पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब पश्चिमी देशों और रूस के बीच तनाव बना हुआ है। इस पृष्ठभूमि में चीन और रूस अपने संबंधों को और अधिक संस्थागत रूप देने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। दोनों देशों ने फरवरी 2022 में “सीमाहीन रणनीतिक साझेदारी” की घोषणा की थी, जिसके बाद व्यापार और ऊर्जा सहयोग में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
यात्रा के दौरान राष्ट्रपति पुतिन चीन के प्रधानमंत्री ली च्यांग से भी मुलाकात करेंगे। इस बैठक में औद्योगिक निवेश, आपूर्ति श्रृंखला, बुनियादी ढांचा विकास और वित्तीय सहयोग पर चर्चा की जाएगी। दोनों पक्ष स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा देने तथा डॉलर पर निर्भरता कम करने की दिशा में भी कदम उठा सकते हैं।
चीन और रूस के बीच व्यापार लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है। ऊर्जा क्षेत्र में रूस चीन का प्रमुख आपूर्तिकर्ता बन चुका है, जबकि चीन रूस को मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स और औद्योगिक उपकरणों की आपूर्ति कर रहा है। दोनों देशों के बीच राजनीतिक और आर्थिक सहयोग को वैश्विक शक्ति संतुलन के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विश्लेषकों के अनुसार, यह यात्रा अंतरराष्ट्रीय मंच पर चीन और रूस के संबंधों को नई मजबूती दे सकती है। दोनों देश बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था और पारस्परिक सहयोग को आगे बढ़ाने के अपने साझा दृष्टिकोण को और स्पष्ट कर सकते हैं।







