पूर्वी चंपारण में पुलिसिंग का नया मॉडल लागू, सिटी SP और ग्रामीण SP के बीच बंटा कार्यक्षेत्र
लोकल डेस्क - वेरॉनिका राय
मोतिहारी। नेपाल सीमा से सटे पूर्वी चंपारण जिले में कानून-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने के लिए पुलिस प्रशासन का नया ढांचा तैयार किया गया है। जिले में अब सिटी एसपी और ग्रामीण एसपी के बीच कार्यक्षेत्र का स्पष्ट विभाजन कर दिया गया है। प्रशासन का मानना है कि इस नई व्यवस्था से पुलिसिंग अधिक प्रभावी, त्वरित और जवाबदेह होगी।
पूर्वी चंपारण बिहार का दूसरा सबसे बड़ा जिला है और नेपाल सीमा से सटा होने के कारण सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। जिले के विशाल भौगोलिक क्षेत्र, बढ़ती आबादी और सीमावर्ती इलाकों की सुरक्षा जरूरतों को देखते हुए सरकार ने ग्रामीण एसपी के नए पद का सृजन किया है। इसके साथ ही अनुमंडलों और थाना क्षेत्रों का पुनर्विभाजन भी किया गया है।
डीआईजी हरिकिशोर राय ने बताया कि इस संबंध में तैयार प्रस्ताव को अनुमोदित कर पुलिस मुख्यालय भेज दिया गया है। नई व्यवस्था के तहत ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में अलग-अलग स्तर पर पुलिसिंग को मजबूत करने की रणनीति बनाई गई है।
नई व्यवस्था के अनुसार ग्रामीण एसपी के अधीन अरेराज, पकड़ीदयाल, रक्सौल और सिकरहना अनुमंडल रहेंगे। इन क्षेत्रों में नेपाल सीमा से जुड़े संवेदनशील इलाकों की निगरानी, तस्करी पर नियंत्रण और सीमाई अपराधों की रोकथाम की जिम्मेदारी प्राथमिक रूप से ग्रामीण एसपी संभालेंगे।
वहीं सिटी एसपी स्वर्ण प्रभात के अधीन मोतिहारी सदर और चकिया अनुमंडल रहेंगे। शहरी क्षेत्रों में ट्रैफिक प्रबंधन, अपराध नियंत्रण, कानून-व्यवस्था बनाए रखने और त्वरित पुलिस कार्रवाई पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
जिले में एसएसबी की कई बॉर्डर आउटपोस्ट पहले से सक्रिय हैं। ग्रामीण एसपी की नियुक्ति के बाद पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होने की उम्मीद है। इससे अवैध गतिविधियों, तस्करी और अन्य सीमाई अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा।
स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि लंबे समय से जिले के विशाल क्षेत्रफल को देखते हुए अलग ग्रामीण एसपी की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। नई व्यवस्था से पुलिस प्रशासन अधिक तेज, पारदर्शी और प्रभावी तरीके से कार्य कर सकेगा।







