नेशनल डेस्क, नीतीश कुमार |
नई दिल्ली। सरकार ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में आई बाधाओं के बीच घरेलू रसोई गैस (एलपीजी) का उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से प्राकृतिक गैस की आपूर्ति पर आवश्यक वस्तु अधिनियम (एस्मा) लागू कर दिया है। इसके तहत उद्योगों को दी जाने वाली गैस आपूर्ति में कटौती की जाएगी।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा जारी ‘प्राकृतिक गैस (आपूर्ति विनियमन) आदेश, 2026’ के अनुसार घरेलू पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी), परिवहन के लिए सीएनजी, एलपीजी उत्पादन तथा पाइपलाइन संचालन से जुड़ी आवश्यक जरूरतों को प्राथमिकता सेक्टर-1 में रखा गया है। इन क्षेत्रों को पिछले छह महीनों की औसत खपत के बराबर गैस आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी, जबकि अन्य क्षेत्रों की आपूर्ति में कमी की जाएगी।
सरकारी गजट अधिसूचना में कहा गया है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में गैस की निरंतर उपलब्धता और वितरण में संतुलन बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया है।
उर्वरक संयंत्रों को प्राथमिकता सेक्टर-2 में रखा गया है, जिन्हें पिछले छह महीनों की औसत खपत का 70 प्रतिशत तक गैस उपलब्ध कराई जाएगी और इसका उपयोग अन्य किसी उद्देश्य के लिए नहीं किया जा सकेगा।
प्राथमिकता सेक्टर-3 में चाय उद्योग, विनिर्माण इकाइयों और अन्य औद्योगिक उपभोक्ताओं को शामिल किया गया है, जिन्हें पिछले छह महीनों की औसत खपत का 80 प्रतिशत तक गैस उपयोग की अनुमति होगी। इसकी निगरानी की जिम्मेदारी सिटी गैस वितरकों को दी गई है।
इसके अलावा पेट्रोकेमिकल और बिजली संयंत्रों की गैस आपूर्ति में भी आंशिक या पूर्ण कटौती की जाएगी। सरकार ने तेल शोधन कंपनियों को एलपीजी का घरेलू उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं, ताकि आम उपभोक्ताओं को इसकी कमी का सामना न करना पड़े। इसके लिए अन्य क्षेत्रों की गैस आपूर्ति कम कर एलपीजी उत्पादन में इस्तेमाल किया जाएगा।
तेल शोधन कंपनियों को पिछले छह महीनों की औसत खपत के 65 प्रतिशत तक ही गैस उपयोग करने के निर्देश दिए गए हैं। आदेश में कहा गया है कि भारतीय गैस प्राधिकरण (गेल) पेट्रोलियम योजना एवं विश्लेषण प्रकोष्ठ (पीपीएसी) के समन्वय से गैस आपूर्ति का प्रबंधन करेगा। पीपीएसी प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के लिए स्थानांतरित गैस का संयुक्त मूल्य भी अधिसूचित करेगा।
यह आदेश पहले से किए गए गैस खरीद समझौतों के प्रावधानों को भी प्रभावहीन कर देगा। इससे तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम, रिलायंस इंडस्ट्रीज, ऑयल इंडिया और वेदांता जैसी प्राकृतिक गैस उत्पादक कंपनियां प्रभावित होंगी। साथ ही गेल, गैस विपणन कंपनियां, एलएनजी टर्मिनल ऑपरेटर, गैस पाइपलाइन संचालक और शहरी गैस वितरण नेटवर्क से जुड़े ढांचे पर भी इसका असर पड़ेगा।







