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बाकी सब नादान यही जीवन का भ्रम है: बिमल सर्राफ

लोकल डेस्क, ऋषि राज।

रक्सौल: जिस प्रकार जंगल में वनस्पति और जड़ी बूटी सिर्फ जानने वाले को दिखती है,उसी प्रकार जीवन में भूल और भगवान सिर्फ मानने वाले को दिखते हैं।उक्त विचार लायंस क्लब ऑफ रक्सौल के अध्यक्ष सह मीडिया प्रभारी एवं भारत विकास परिषद् ,रक्सौल के सेवा संयोजक सह मीडिया प्रभारी सह सामाजिक कार्यकर्ता  बिमल सर्राफ ने प्रेस से साझा किया।

चलने वाले पैरों में कितना फर्क है,एक आगे तो एक पीछे पर ना तो आगे वाले को "अभिमान" है और ना पीछे वाले को "अपमान" क्योंकि उन्हें पता होता है कि पलभर में ये बदलने वाला होता है,इसी को जिंदगी कहते है"। जिस व्यक्ति ने खुद अपने बलबूते पर काम करके तरक्की पाई हो उसे कुछ फर्क नहीं पड़ता कि जिंदगी में कौन आ रहा है या कौन जा रहा है। उनकी सोच में तो यह होता है कि "तूफानों फिर से तैयारी कर लो,मैंने फिर नया आशियां बना लिया है" किसी आदमी के आने-जाने का दर्द तो उसे होता है जो दूसरे के बलबूते उठने की चाहत रखते हैं (Confidence Is Needed)। समझदार एक मै हूँ बाकी सब नादान।बस इसी भ्रम में घुम रहा आजकल हर इंसान,जीवन की विषम परिस्थितियों में एक तरफ आपके साथ मीठी बातों से सहानुभूति (Sympathy) करने वाले तो दूसरी तरफ कड़वी,कठोर बातों से आपको प्रेरणा (Motivation) देने वाले लोग होते हैं ।

आप पर निर्भर है कि अगर सहानुभूति रखने वालों पर ध्यान देते हैं तो आप दुःख तो पाएंगे ही कमजोर भी बनते जाएंगे।मोटिवेट करने वालों की तरफ ध्यान देते हैं तो निश्चित है आप इन समस्या से अपना बचाव ही नहीं करेंगे बल्कि मजबूत भी बनेंगे। ज्ञान और अनुभव व्यक्तिगत होते हैं,जबकि मनुष्यता सदैव सदैव दूसरों के सुख-दुःख के लिए होती है।अपने स्वार्थ की बात तो पशु भी जानते हैं किंतु सच्चा मनुष्य वह है जो दूसरों के लिए अपना सुख छोड़ दे। कहते हैं, भगवान ने दुःख दिया पर जो दुःख देता है उसे दुश्मन कहा जाता है,भगवान को तो सुखदाता कहते हैं फिर वो दुःख कैसे देंगे।जीवन रूपी नैय्या का नाविक स्वयं ईश्वर है जो हमें इस जीवन के महासागर में कभी डूबने नहीं देते।मनुष्य के जीवन में जो घट रहा है,जो आगे होगा,जो पहले बीत चुका,सबका रिमोट स्वयं ईश्वर के पास है इसलिए निरर्थक सोचना स्वयं को दुःख देना है।