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बिहार पुलिस में अब बिचौलिए की नो एंट्री, न रीलबाजी

स्टेट डेस्क, एन के सिंह।

अनुशासन बनाए रखने के लिए सभी पुलिसकर्मियों को व्हाट्सएप डीपी पर केवल वर्दी वाली आधिकारिक फोटो लगाने का आदेश।

पटना: बिहार पुलिस की कार्यप्रणाली को पटरी पर लाने और वर्दी की आन-बान-शान बहाल करने के लिए पुलिस महानिदेशक विनय कुमार ने एक ऐसा 'मास्टरस्ट्रोक' खेला है, जिसने महकमे के भीतर हड़कंप मचा दिया है। डीजीपी ने स्पष्ट कर दिया है कि अब थानों में किसी भी 'बिचौलिए' की एंट्री नहीं होगी और जो पुलिसकर्मी जनता की सेवा छोड़कर सोशल मीडिया पर 'रील' बनाने में मशगूल रहेंगे, उनकी वर्दी उतरना तय है। बिहार में 'ऑपरेशन क्लीन' के जरिए पुलिसिंग के एक नए युग की शुरुआत हो चुकी है।

थानों से दलालों का बोरिया-बिस्तर गोल

दशकों से थानों में जड़ें जमाए बैठे 'दलाली सिंडिकेट' पर डीजीपी ने सर्जिकल स्ट्राइक की है। अब तक थानों में केस मैनेज करने और पैरवी के लिए घूमने वाले सफेदपोश बिचौलियों के दिन लद गए हैं। मुख्यालय के नए आदेश के मुताबिक, अब हर थाने में 'विजिटर रजिस्टर' अनिवार्य कर दिया गया है। थाने की चौखट पार करने वाले हर शख्स को अपना नाम, पता और आने का ठोस कारण दर्ज कराना होगा। डीजीपी ने सीधे शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि किसी थानेदार की सरपरस्ती में दलाली की पुष्टि हुई, तो कार्रवाई केवल दलाल पर नहीं, बल्कि सीधे उस क्षेत्र के थानेदार पर गिरेगी।

रील बनाने का शौक पड़ेगा भारी, "ड्यूटी या रील, चुनें एक!"

आजकल खाकी पहनकर फिल्मी गानों पर थिरकने और वीडियो बनाने का जो 'डिजिटल बुखार' पुलिसकर्मियों पर चढ़ा था, उस पर डीजीपी ने ठंडे पानी की बौछार कर दी है। डीजीपी विनय कुमार का संदेश रॉक-सॉलिड है— "ऑन-ड्यूटी रील बनाई, तो नौकरी जाएगी।" ड्यूटी के दौरान बेवजह मोबाइल चैटिंग और वीडियो देखने को अब गंभीर अनुशासनहीनता की श्रेणी में रखा गया है। इतना ही नहीं, प्रोफेशनल मर्यादा को बनाए रखने के लिए अब सभी पुलिसकर्मियों को अपने व्हाट्सएप डीपी पर केवल आधिकारिक वर्दी वाली फोटो लगानी होगी। यह कदम पुलिस की उस छवि को सुधारने के लिए है जो सोशल मीडिया की चकाचौंध में कहीं खो गई थी।

जनता से बदतमीजी यानी 'कैरियर खत्म'

हाल ही में नालंदा में आंगनबाड़ी सेविका के साथ हुई मारपीट और पटना के बिहटा में महिला दरोगा के 'थप्पड़ कांड' ने खाकी को शर्मसार किया था। डीजीपी ने इन घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए मिसाल पेश की है। उन्होंने साफ कहा है कि वर्दी जनता को डराने के लिए नहीं, बल्कि उनकी सुरक्षा के लिए है। किसी भी स्तर पर आम जनता के साथ दुर्व्यवहार होने पर अब केवल 'लाइन हाजिर' की खानापूर्ति नहीं होगी, बल्कि तत्काल निलंबन और कठोर विभागीय कार्रवाई की जाएगी। पुलिस मुख्यालय का 'जीरो टॉलरेंस' मॉडल अब धरातल पर दिखने लगा है।

अपराध मुक्त बिहार, सिस्टम के अंदर भी सफाई

डीजीपी विनय कुमार का यह अभियान केवल बाहरी अपराधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि 'सिस्टम' के भीतर छिपे उन काली भेड़ों के खिलाफ भी है जो भ्रष्टाचार और अनुशासनहीनता को बढ़ावा देते हैं। 'क्लीन अभियान' के तहत दागी अधिकारियों को चिन्हित किया जा रहा है। इस सख्ती का असर यह है कि अब आम आदमी बेझिझक थाने जाने की हिम्मत जुटा पा रहा है।

"मेरा लक्ष्य स्पष्ट है—बिहार पुलिस का हर जवान जनता का मित्र हो और अपराधियों का काल। जो अनुशासन में रहेगा वही सेवा में रहेगा।" — विनय कुमार, डीजीपी, बिहार