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बिहार बोर्ड मैट्रिक रिजल्ट: बेटियों ने फिर रचा इतिहास

स्टेट डेस्क, एन के सिंह।

लगातार 8वीं बार देश में सबसे पहले रिजल्ट जारी कर बिहार बोर्ड ने बनाया नया रिकॉर्ड; जमुई और वैशाली की बेटियों ने किया स्टेट टॉप

मोतिहारी/पटना। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) ने एक बार फिर इतिहास दोहराते हुए देश में सबसे पहले मैट्रिक का परीक्षा परिणाम जारी कर दिया है। जैसे ही रिजल्ट का बटन दबा, पूरे सूबे में खुशियों की लहर दौड़ गई। इस बार के नतीजों ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि बिहार की बेटियां किसी से कम नहीं हैं। छात्राओं का पासिंग प्रतिशत छात्रों की तुलना में करीब 3% अधिक रहा है, जो महिला सशक्तिकरण की एक बुलंद तस्वीर पेश करता है।

आंकड़ों की जुबानी: बेटियों की शानदार 'बल्ले-बल्ले'

इस वर्ष की परीक्षा में कुल 12 लाख 35 हजार 743 परीक्षार्थी सफल हुए हैं। नतीजों का विश्लेषण करें तो लड़कियों ने लड़कों को पीछे छोड़ते हुए बाजी मारी है:
 
सफल छात्राएं: 6,34,353 (51.33%)
 सफल छात्र: 6,01,390 (48.66%)
 फर्स्ट डिवीजन: 4,43,723 छात्र-छात्राओं ने प्रथम श्रेणी हासिल कर अपना लोहा मनवाया।

टॉप-5 में बेटियों का दबदबा: जमुई और वैशाली की बेटियों ने लहराया परचम
इस बार की मेरिट लिस्ट में कड़ा मुकाबला देखने को मिला। टॉप 5 रैंक पर कुल 13 छात्र-छात्राओं ने अपनी जगह बनाई है। जमुई की पुष्पांजलि कुमारी और वैशाली की सबरीन परवीन ने 492 अंक लाकर संयुक्त रूप से पूरे राज्य में प्रथम स्थान प्राप्त किया है।

01 पुष्पांजलि कुमारी & सबरीन परवीन जमुई  वैशाली 492 
02  नाहिद सुल्तान  बेगूसराय  489 
03 अनूपा कुमारी & ओम कुमार बक्सर  बेगूसराय  488 
04 ज्योति, अनुभव और अंश राज समस्तीपुर  बांका  पूर्णिया 487 
 05  प्रेरणा, नसरीन, अबनीश, बिकास, रुपेश  विभिन्न जिले 486 

खास बातें: जो इस रिजल्ट को बनाती हैं 'स्पेशल'
 
 देश में नंबर 1: बिहार बोर्ड लगातार 8वीं बार देश का ऐसा पहला बोर्ड बना है जिसने सबसे कम समय में सटीक परिणाम घोषित किए।
 
 मेहनत का फल: 17 फरवरी से 26 फरवरी के बीच राज्य के 1762 केंद्रों पर हुई इस परीक्षा में लाखों छात्र शामिल हुए थे।
 
गांव-कस्बों का जलवा: टॉपर्स की सूची में अधिकांश छात्र ग्रामीण परिवेश और साधारण परिवारों से आते हैं, जिन्होंने अपनी प्रतिभा से सबको चौंका दिया।

बदलते बिहार की नई तस्वीर

रिजल्ट जारी होने के बाद स्कूलों और घरों में जश्न का माहौल है। कहीं मिठाई बंट रही है तो कहीं ढोल-नगाड़े बज रहे हैं। विशेषकर प्रथम श्रेणी में आने वाले 4.43 लाख से अधिक छात्रों के घरों में उत्सव जैसा माहौल है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि छात्राओं का बेहतर प्रदर्शन राज्य सरकार की 'साइकिल योजना' और 'पोशाक योजना' जैसी दूरगामी नीतियों का सुखद परिणाम है।