स्पोर्ट्स डेस्क, मुस्कान कुमारी।
अनुबंध खत्म होने के तीन महीने बाद तक खिलाड़ी-अधिकारी बंधे रहेंगे
मुंबई। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने आईपीएल सीजन खत्म होने के बाद भी एंटी-डिस्क्रिमिनेशन कोड को लागू रखने का बड़ा फैसला लिया है। अब यह कोड फ्रेंचाइजी के साथ खिलाड़ियों और अधिकारियों के अनुबंध समाप्त होने के तीन महीने बाद तक भी लागू रहेगा और उस दौरान या उससे पहले हुए किसी भी उल्लंघन पर बीसीसीआई/आईपीएल का अधिकार क्षेत्र बरकरार रहेगा।
यह कोड हाल ही में सभी फ्रेंचाइजी को साझा किया गया है। 11 पन्नों के इस दस्तावेज में साफ लिखा है कि खिलाड़ी और टीम अधिकारी अपने अनुबंध या फ्रेंचाइजी के साथ किसी भी अन्य व्यवस्था के खत्म होने के तीन महीने बाद तक भी कोड के पाबंद रहेंगे। बीसीसीआई का कहना है कि इससे लीग की छवि, लोकप्रियता और अखंडता बरकरार रखने में मदद मिलेगी।
कोड का मकसद और परिभाषा
बीसीसीआई का उद्देश्य साफ है- लीग में किसी भी तरह के नस्लीय या धार्मिक भेदभाव को रोकना। कोड में उल्लंघन की परिभाषा बहुत व्यापक है। इसमें भाषा, इशारा या किसी भी तरह का ऐसा व्यवहार शामिल है जो किसी खिलाड़ी, टीम अधिकारी, अंपायर, मैच रेफरी या दर्शक को उनकी जाति, धर्म, संस्कृति, रंग, वंश, राष्ट्रीय या जातीय मूल, लिंग, लैंगिक झुकाव, विकलांगता, वैवाहिक स्थिति या मातृत्व के आधार पर अपमानित, धमकाने या नीचा दिखाने वाला हो।
यह कोड ऑफ कंडक्ट से अलग है। कोड ऑफ कंडक्ट सामान्य अनुशासन से जुड़ा है जबकि एंटी-डिस्क्रिमिनेशन कोड सिर्फ भेदभाव और अपमानजनक व्यवहार पर केंद्रित है। बीसीसीआई का मानना है कि इससे लीग की साख बनी रहेगी और दर्शकों का विश्वास कायम रहेगा।
उल्लंघन पर सख्त सजा का प्रावधान
पहली बार उल्लंघन करने पर खिलाड़ी या अधिकारी को चार से आठ मैचों के लिए सस्पेंड किया जा सकता है। दूसरी बार सजा आठ मैचों से लेकर लीग में आजीवन प्रतिबंध तक हो सकती है। तीसरी या उसके बाद की घटना पर एक साल से लेकर आजीवन लीग से बाहर करने तक की सजा दी जा सकती है।
हर मामले में सजा के साथ अनिवार्य रूप से शिक्षा या काउंसलिंग प्रोग्राम पूरा करना होगा। यह प्रोग्राम उस मुद्दे पर जागरूकता बढ़ाने के लिए होगा जिसके लिए सजा दी गई है।
ओम्बड्समैन करेगा फैसला, मैच रिजल्ट पर कोई असर नहीं
सभी मामलों की सुनवाई बीसीसीआई ओम्बड्समैन करेगा। हालांकि ओम्बड्समैन को किसी मैच के नतीजे बदलने या रद्द करने का अधिकार नहीं होगा। फैसला आने के बाद बीसीसीआई और सभी फ्रेंचाइजी इसे बिना किसी अतिरिक्त औपचारिकता के स्वीकार करेंगे और लागू करेंगे। फ्रेंचाइजी के लिए यह लीग में हिस्सा लेने की शर्त होगी कि वे कोड का पूरा पालन करें।
रिपोर्टिंग का समय सीमा तय
उल्लंघन की रिपोर्ट अंपायर, मैच रेफरी, टीम मैनेजर, फ्रेंचाइजी के अधिकृत वरिष्ठ प्रतिनिधि या बीसीसीआई के गेम डेवलपमेंट के जीएम द्वारा घटना के 36 घंटे के अंदर बीसीसीआई के सीईओ को दी जा सकती है। इसके बाद जांच शुरू होगी।
यह फैसला लीग की साफ-सुथरी छवि बनाए रखने के लिए उठाया गया है। अब खिलाड़ी और अधिकारी जानते हैं कि मैदान के बाहर या अनुबंध खत्म होने के बाद भी भेदभाव से जुड़े किसी भी बर्ताव की कीमत चुकानी पड़ सकती है।







