नेशनल डेस्क,श्रेयांश पराशर l
नई दिल्ली। भारत और अमेरिका की कंपनियों के बीच जेट इंजन के संयुक्त निर्माण को लेकर एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ है, जिसे देश की रक्षा क्षमता को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। अमेरिकी रक्षा निर्माता जीई एयरोस्पेस और भारत की हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) ने एफ414 जेट इंजन के सह-उत्पादन के लिए तकनीकी शर्तों पर सहमति बना ली है।
करीब तीन वर्षों से चल रही बातचीत के बाद यह समझौता अंतिम चरण में पहुंचा है। इस करार में केवल इंजन निर्माण ही नहीं, बल्कि उन्नत तकनीक का हस्तांतरण भी शामिल है, जिससे भारत को अत्याधुनिक रक्षा तकनीक हासिल होगी।
यह पहल केंद्र सरकार की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत वायुसेना के आधुनिकीकरण और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दिया जा रहा है। भारत की योजना है कि इन इंजनों का उपयोग 120 से 130 अगली पीढ़ी के स्वदेशी विकसित लड़ाकू विमानों में किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझौते से भारत की रूस पर दशकों पुरानी निर्भरता कम होगी और देश अपनी रक्षा जरूरतों को खुद पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ेगा। साथ ही, भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो सकता है जो उच्च क्षमता वाले जेट इंजन का निर्माण करते हैं।
अमेरिका के लिए भी यह समझौता रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। वर्ष 2023 में अमेरिकी प्रशासन ने इस डील को तेजी से आगे बढ़ाया, जिसका उद्देश्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र में संतुलन बनाए रखना और भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना है।
कुल मिलाकर, यह समझौता भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता और वैश्विक रक्षा क्षेत्र में उसकी मजबूत उपस्थिति की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।







