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भारत-मलेशिया के बीच मजबूत साझेदारी: मोदी बोले, आतंक पर कोई समझौता नहीं

विदेश डेस्क, मुस्कान कुमारी।

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मलेशियाई समकक्ष अनवर इब्राहिम ने रविवार को व्यापक वार्ता के बाद द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का संकल्प लिया, जिसमें रक्षा, सेमीकंडक्टर और व्यापार जैसे क्षेत्रों में 11 समझौते हुए। दोनों नेताओं ने आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर जोर दिया और इंडो-पैसिफिक में शांति सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता जताई।

समझौतों से नई दिशा

भारत और मलेशिया ने रक्षा, ऊर्जा, उन्नत विनिर्माण और सेमीकंडक्टर जैसे प्राथमिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। मोदी ने कहा, "हमारी साझेदारी विशेष है, जो सदियों पुरानी सांस्कृतिक और समुद्री निकटता पर आधारित है।" दोनों देशों ने स्थानीय मुद्राओं- भारतीय रुपए और मलेशियाई रिंगगिट- में व्यापार निपटान को बढ़ावा देने के प्रयासों की सराहना की, जो द्विपक्षीय व्यापार को गति देगा। मोदी ने मलेशिया में भारतीय मूल के मंत्रियों, सांसदों और सीनेटरों से मुलाकात की और उनकी भूमिका की प्रशंसा की। उन्होंने कहा, "हम रणनीतिक विश्वास के माध्यम से आर्थिक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त करेंगे।" अनवर ने भारत की आर्थिक वृद्धि को "अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में शानदार उभार" बताते हुए कहा कि मलेशिया को इससे फायदा होगा।

आतंकवाद पर सख्त संदेश

वार्ता में आतंकवाद का मुद्दा प्रमुख रहा। मोदी ने स्पष्ट कहा, "आतंकवाद पर हमारा संदेश साफ है: कोई दोहरा मापदंड नहीं, कोई समझौता नहीं।" दोनों नेताओं ने क्रॉस-बॉर्डर आतंकवाद सहित सभी रूपों में आतंकवाद की निंदा की और खुफिया साझाकरण, समुद्री सुरक्षा और काउंटर-टेररिज्म में सहयोग मजबूत करने का फैसला किया। संयुक्त बयान में कहा गया कि वे रेडिकलाइजेशन, हिंसक उग्रवाद और आतंकवाद के वित्तपोषण को रोकने के लिए वैश्विक प्रयासों में योगदान देंगे। दोनों पक्षों ने नई और उभरती तकनीकों के आतंकवादी उपयोग को रोकने पर भी जोर दिया। संयुक्त राष्ट्र और फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) जैसे बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग बढ़ाने का संकल्प लिया गया।

इंडो-पैसिफिक में शांति की प्रतिबद्धता

मोदी ने इंडो-पैसिफिक को दुनिया का विकास इंजन बताते हुए कहा कि भारत और मलेशिया आसियान के साथ मिलकर क्षेत्र में विकास, शांति और स्थिरता सुनिश्चित करेंगे। उन्होंने आसियान की केंद्रीयता पर भारत के दृढ़ रुख को दोहराया और ASEAN-India Trade Agreement (AITIGA) की समीक्षा जल्द पूरी करने पर सहमति जताई। मलेशिया ने सुधारित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन किया। मोदी ने कहा, "वैश्विक अस्थिरता के इस दौर में भारत-मलेशिया की बढ़ती दोस्ती दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण है। वैश्विक संस्थाओं में सुधार आज की चुनौतियों से निपटने के लिए जरूरी है।"

व्यापार और निवेश पर फोकस

मोदी ने मलेशिया के प्रमुख उद्योगपतियों से मुलाकात की और भारत में कारोबार सुगमता के सुधारों को रेखांकित किया। उन्होंने इंफ्रास्ट्रक्चर, नवीकरणीय ऊर्जा, डिजिटल तकनीक, सेमीकंडक्टर, एआई और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में अवसरों का जिक्र किया। CEO फोरम में चर्चा से व्यापार और निवेश के नए द्वार खुले। मोदी ने मलेशिया में भारतीय कांसुलेट जनरल स्थापित करने की घोषणा की, जो द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करेगा। अनवर ने स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को "उल्लेखनीय" बताया।

वैश्विक मुद्दों पर चर्चा

दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर सार्थक चर्चा की। मोदी ने कहा, "हम शांति के सभी प्रयासों का समर्थन करेंगे।" संयुक्त बयान में बहुपक्षीयता को मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय संगठनों को समकालीन वास्तविकताओं के अनुरूप बनाने का वादा किया गया। मोदी ने भारतीय मूल के राजनीतिक नेताओं से मुलाकात में उनकी भूमिका की सराहना की। इनमें डिजिटल मंत्री गोबिंद सिंह देव, मानव संसाधन मंत्री रमनन रामकृष्णन और अन्य शामिल थे। उन्होंने कहा कि ये नेता भारत-मलेशिया संबंधों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण हैं।

मोदी की एमजीआर से जुड़ी टिप्पणी

अनवर को एमजीआर का बड़ा प्रशंसक बताते हुए मोदी ने सांस्कृतिक जुड़ाव पर जोर दिया। अनवर ने भारत की आर्थिक प्रगति से मलेशिया को लाभ होने की बात कही। मोदी ने शनिवार को कुआलालंपुर पहुंचने पर गर्मजोशी से स्वागत का जिक्र किया। यह यात्रा 2024 में उन्नत व्यापक रणनीतिक साझेदारी का विस्तार है।