Ad Image
Ad Image
ट्रंप ने कहा, खाड़ी देशों की अपील पर ईरान पर हमले बंद किए गए || अदाणी समूह को अमेरिका से क्लीनचिट, आपराधिक मामलों में राहत || राहुल गांधी ने कहा, देश में बड़ा आर्थिक संकट आने वाला, आम आदमी होगा परेशान || भारत और नार्वे के बीच कुल 9 समझौतों पर हस्ताक्षर, बेहतर सहयोग की पहल: मोदी || अहमदाबाद - मुंबई हाईवे पर दर्दनाक सड़क हादसा, 12 की मौत 25 से ज्यादा घायल || राष्ट्रपति ट्रंप का दावा: समझौते के लिए ईरान बेताब, ईरान का इनकार || Delhi - NCR में सीएनजी फिर महंगा, तीन दिन में तीसरी बार कीमत वृद्धि || PM मोदी का नीदरलैंड दौरा, द्विपक्षीय रिश्ते की बेहतरी पर बल दिया || लन्दन: ब्रिटिश PM कीर स्टारमर दे सकते है इस्तीफा, स्थानीय चुनावों में पार्टी की हार का असर || युद्ध समाप्ति पर ईरान के साथ सकारात्मक बातचीत हुई: राष्ट्रपति ट्रंप

The argument in favor of using filler text goes something like this: If you use any real content in the Consulting Process anytime you reach.

  • img
  • img
  • img
  • img
  • img
  • img

Get In Touch

भारतीय महिलाओं का 'स्वर्ण भंडार': दुनिया के सबसे बड़े देशों के खजाने से भी अधिक

नेशनल डेस्क, श्रेया पाण्डेय। 

भारतीय संस्कृति में सोने का महत्व केवल एक आभूषण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सुरक्षा, परंपरा और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। हाल ही में सामने आए आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि भारतीय महिलाओं के पास मौजूद सोने की मात्रा वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक बड़ा स्थान रखती है। अनुमान के मुताबिक, दुनिया का लगभग 11 प्रतिशत सोना अकेले भारतीय महिलाओं के पास है। यह मात्रा लगभग 24,000 से 25,000 टन के बीच आंकी गई है, जो न केवल चौंकाने वाली है, बल्कि कई विकसित देशों के कुल आधिकारिक स्वर्ण भंडार से भी कहीं अधिक है।

यह समझना दिलचस्प है कि भारतीय घरों में सोना केवल सजावट की वस्तु नहीं, बल्कि एक 'सुरक्षित निवेश' (Safe Haven) माना जाता है। भारत में मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों में भी सोने की बचत करने की गहरी परंपरा है। यदि हम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी तुलना करें, तो भारतीय महिलाओं का यह निजी सोना अमेरिका, जर्मनी, इटली और फ्रांस जैसे देशों के केंद्रीय बैंकों में रखे गए कुल स्वर्ण भंडार को भी पीछे छोड़ देता है। यहाँ तक कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के पास भी इतना सोना नहीं है जितना भारतीय गृहणियों के पास संचित है। यह तथ्य भारतीय समाज की बचत करने की प्रवृत्ति और सोने के प्रति उनके अटूट विश्वास को दर्शाता है।

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह 'अघोषित खजाना' भारतीय अर्थव्यवस्था को एक अदृश्य मजबूती प्रदान करता है। संकट के समय में, चाहे वह पारिवारिक विपत्ति हो या वैश्विक आर्थिक मंदी, यह सोना हमेशा एक मजबूत वित्तीय ढाल बनकर उभरता है। भारत में विवाह उत्सवों और त्योहारों, विशेष रूप से दिवाली और अक्षय तृतीया के दौरान सोने की खरीद में भारी उछाल देखा जाता है। दक्षिण भारत के राज्यों में सोने की खपत सबसे अधिक है, जहाँ इसे विरासत के रूप में अगली पीढ़ी को सौंपने की परंपरा है।

हालांकि, इस विशाल भंडार का एक पहलू यह भी है कि इसका अधिकांश हिस्सा घरों की तिजोरियों या लॉकरों में 'डेड एसेट' के रूप में पड़ा रहता है। सरकार ने कई बार 'गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम' जैसी योजनाओं के माध्यम से इस सोने को बैंकिंग प्रणाली में लाने का प्रयास किया है, ताकि इस निष्क्रिय संपत्ति का उपयोग देश के विकास और बुनियादी ढांचे के निर्माण में किया जा सके। लेकिन भावनात्मक जुड़ाव के कारण, भारतीय महिलाएं अपने गहनों को बेचने या गिरवी रखने के बजाय उन्हें सहेज कर रखना अधिक पसंद करती हैं।

निष्कर्ष के तौर पर, 25,000 टन सोने का यह भंडार भारतीय महिलाओं की आर्थिक दूरदर्शिता का प्रमाण है। यह न केवल उनकी व्यक्तिगत सुरक्षा का साधन है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की क्रय शक्ति और सांस्कृतिक समृद्धि का एक अनूठा उदाहरण भी पेश करता है। आने वाले समय में, यदि इस सोने का सही ढंग से वित्तीय उपयोग सुनिश्चित किया जाए, तो यह भारतीय अर्थव्यवस्था की दिशा और दशा बदलने की क्षमता रखता है।