विदेश डेस्क, नीतीश कुमार
नई दिल्ली। भारत और नीदरलैंड के बीच द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रोब जेटेन ने शनिवार को व्यापक वार्ता के बाद दोनों देशों के रिश्तों को औपचारिक रूप से ‘रणनीतिक साझेदारी’ का दर्जा देने पर सहमति व्यक्त की। इस निर्णय को दोनों देशों के बीच बढ़ते भरोसे, साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और सहयोग की व्यापक संभावनाओं का प्रतीक माना जा रहा है।
वार्ता के दौरान दोनों नेताओं ने व्यापार, निवेश, रक्षा, समुद्री सुरक्षा, उभरती प्रौद्योगिकी, स्वच्छ ऊर्जा और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा करने के लिए विस्तृत रोडमैप को मंजूरी दी। उन्होंने कहा कि भारत की तेज़ आर्थिक प्रगति डच उद्योगों और निवेशकों के लिए नए अवसर उपलब्ध करा रही है।
जल प्रबंधन के क्षेत्र में नीदरलैंड की विशेषज्ञता और भारत की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए दोनों देशों ने ‘जल पर रणनीतिक साझेदारी’ को और सशक्त बनाने पर जोर दिया। इसके साथ ही कृषि, खाद्य सुरक्षा, डिजिटल स्वास्थ्य और स्वास्थ्य अनुसंधान के क्षेत्रों में सहयोग को भी नई गति देने का निर्णय लिया गया।
दोनों प्रधानमंत्रियों ने भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते को वैश्विक व्यापार व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए इसके शीघ्र निष्पादन की आवश्यकता पर बल दिया। महत्वपूर्ण खनिजों, आपूर्ति श्रृंखला और औद्योगिक सहयोग के क्षेत्रों में भी साझेदारी बढ़ाने पर सहमति बनी।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर और डिजिटल नवाचार को भविष्य की अर्थव्यवस्था का आधार बताते हुए दोनों देशों ने युवाओं के लिए संयुक्त हैकाथॉन और तकनीकी आदान-प्रदान कार्यक्रम आयोजित करने का समर्थन किया।
हरित ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग को विशेष प्राथमिकता देते हुए ग्रीन हाइड्रोजन, बायोफ्यूल, हरित शिपिंग और समुद्री लॉजिस्टिक्स में संयुक्त परियोजनाओं को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया। शिक्षा और मानव संसाधन विकास के तहत नालंदा विश्वविद्यालय और ग्रोनिंगन विश्वविद्यालय के बीच सहयोग का भी स्वागत किया गया।
प्रधानमंत्री मोदी ने चोल कालीन ताम्रपत्रों की वापसी में सहयोग के लिए डच सरकार का आभार जताया। बैठक के बाद प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, व्यापार, जल, कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा और संस्कृति से जुड़े 14 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए। अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने रोब जेटेन को भारत आने का निमंत्रण दिया, जिसे उन्होंने सहर्ष स्वीकार किया।







