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भारत में निवेश पर कायम Google-Microsoft, ट्रंप दबाव को किया नजरअंदाज

विदेश डेस्क, ऋषि राज |

भारत और अमेरिका के बीच जारी टैरिफ़ विवाद के बावजूद अमेरिकी कंपनियों का भारत में निवेश रुकने का नाम नहीं ले रहा है। बल्कि इसके उलट, अमेरिकी टेक दिग्गज कंपनियां भारत में अपने निवेश का विस्तार कर रही हैं। गूगल और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियों ने भारत की आर्थिक संभावनाओं पर भरोसा जताते हुए अरबों डॉलर के नए निवेश की घोषणा की है।

भारत में बढ़ता अमेरिकी निवेश

गूगल ने हाल ही में यह घोषणा की है कि वह विशाखापत्तनम में एक विशाल डाटा सेंटर हब स्थापित करने के लिए 10 अरब डॉलर (लगभग 88,730 करोड़ रुपये) का निवेश करेगी। यह कदम भारत की डिजिटल अवसंरचना को सशक्त करने की दिशा में ऐतिहासिक माना जा रहा है। कंपनी ने पहले 2024 में 6 अरब डॉलर निवेश की योजना जताई थी, लेकिन अब उसने अपनी निवेश सीमा में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की है। इस निवेश को लेकर नई दिल्ली में जल्द ही समझौता होने की संभावना है।

माइक्रोसॉफ्ट ने भी भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सेंटर स्थापित करने की योजना को अंतिम रूप दे दिया है। कंपनी के सीईओ सत्य नडेला ने जनवरी 2025 में भारत यात्रा के दौरान दो वर्षों में 3 अरब डॉलर निवेश की घोषणा की थी। यह निवेश भारत में एआई टेक्नोलॉजी और रिसर्च को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया जा रहा है। कंपनी का मानना है कि भारत आने वाले वर्षों में वैश्विक एआई हब के रूप में उभर सकता है।

माइक्रोसॉफ्ट की भारतीय टीम ने जुलाई 2025 में जब अमेरिका और भारत के बीच टैरिफ़ विवाद अपने चरम पर था—तभी इस निवेश प्रस्ताव को अंतिम रूप दे दिया था। यह निर्णय इस बात का संकेत है कि अमेरिकी कंपनियां भारत की दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता और बाजार की क्षमता पर भरोसा करती हैं।

टैरिफ विवाद के बीच निवेश जारी

भारत और अमेरिका के बीच टैरिफ  विवाद को तीन महीने से अधिक का समय बीत चुका है। दोनों देशों की सरकारें लगातार बातचीत कर समाधान खोजने में जुटी हैं, लेकिन अभी तक कोई निर्णायक नतीजा नहीं निकला है। इसके बावजूद, अमेरिकी कॉरपोरेट सेक्टर इस विवाद से अप्रभावित दिखाई दे रहा है।

फिक्की और सीआईआई जैसे प्रमुख उद्योग संगठनों का कहना है कि अमेरिकी कंपनियों ने अब तक कोई संकेत नहीं दिया है कि टैरिफ विवाद के कारण वे भारत में अपनी योजनाओं पर पुनर्विचार कर रही हैं। इसके उलट, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, अमेजन, एप्पल और अन्य अमेरिकी निवेश फंड्स भारत में नई परियोजनाओं और साझेदारियों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

भारत के प्रति अमेरिकी कंपनियों का भरोसा

भारत की तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था, विशाल उपभोक्ता आधार और स्थिर राजनीतिक माहौल ने विदेशी निवेशकों का भरोसा मजबूत किया है। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत की नई डिजिटल इंडिया नीति, AI मिशन, और सेमीकंडक्टर निर्माण कार्यक्रम जैसी पहलों ने अमेरिकी कंपनियों को आकर्षित किया है।

भारत सरकार ने भी विदेशी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए कई नीतिगत सुधार किए हैं। विशेष रूप से तकनीकी और विनिर्माण क्षेत्रों में कर प्रोत्साहन और आसान नियामक प्रक्रियाओं ने भारत को निवेश के लिए एक आकर्षक गंतव्य बना दिया है।

गूगल और माइक्रोसॉफ्ट के ये निवेश भारत-अमेरिका के आर्थिक रिश्तों में एक नई जान फूंक रहे हैं। यह स्पष्ट संकेत है कि अमेरिकी कंपनियां अल्पकालिक राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर भारत को एक दीर्घकालिक रणनीतिक भागीदार के रूप में देख रही हैं।

जहां एक ओर ट्रंप प्रशासन व्यापारिक सख्ती पर अड़ा है, वहीं अमेरिकी कॉरपोरेट सेक्टर भारत के साथ अपने संबंधों को और गहरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। यह निवेश न केवल भारत की डिजिटल और एआई क्षमताओं को सशक्त करेगा, बल्कि दोनों देशों के बीच तकनीकी साझेदारी के नए युग की भी शुरुआत करेगा।