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भ्रष्टाचार पर बड़ा प्रहार: गरीबों के घर पर डाका डालने वालों की खैर नहीं

लोकल डेस्क, एन के सिंह ।

पकड़ीदयाल में आवास योजना के नाम पर अवैध वसूली और धांधली पड़ी भारी: एक की सेवा समाप्त, तीन के वेतन पर चली कैंची

पूर्वी चम्पारण: प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) में भ्रष्टाचार की जड़ें खोदने के लिए पूर्वी चम्पारण जिला प्रशासन ने 'जीरो टॉलरेंस' का अपना सबसे तीखा हथियार निकाल लिया है। पकड़ीदयाल प्रखंड में गरीबों के हक पर कुंडली मारकर बैठे भ्रष्ट कर्मियों के खिलाफ जिलाधिकारी के निर्देश पर ऐसी सख्त कार्रवाई की गई है, जिससे पूरे जिले के प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। भ्रष्टाचार के इस खेल में शामिल एक कार्यपालक सहायक का अनुबंध तत्काल प्रभाव से रद्द (बर्खास्त) कर दिया गया है, जबकि तीन अन्य आवास सहायकों के वेतन में अगले दो वर्षों के लिए भारी कटौती का आदेश जारी हुआ है।

भ्रष्टाचार की 'जियो टैगिंग': दूसरे का घर दिखाकर डकारे सरकारी पैसे

यह पूरा मामला तब सामने आया जब पकड़ीदयाल प्रखंड प्रमुख श्रीमती पिंकी देवी ने एक परिवाद पत्र के जरिए प्रशासन को भ्रष्टाचार के सबूत सौंपे। इसके बाद निदेशक, डीआरडीए (DRDA) मोतिहारी की जांच टीम ने जब धरातल पर तफ्तीश शुरू की, तो धांधली की ऐसी परतें खुलीं कि अधिकारी भी दंग रह गए। जांच में न केवल ऑडियो-वीडियो साक्ष्य मिले, बल्कि यह भी पाया गया कि जिन लोगों के पास पहले से ही पक्के मकान थे, उन्हें लाभुक बना दिया गया। कहीं दूसरे का घर दिखाकर फर्जी जियो टैगिंग की गई, तो कहीं किश्तों के भुगतान के बदले मोटी रकम की वसूली की गई।

इन 'गुनहगारों' पर गिरी गाज: रडार पर आए चार अधिकारी
 
विनय कुमार राम (कार्यपालक सहायक) - बर्खास्त: इनका मुख्य काम ऑफिस में डेटा एंट्री का था, लेकिन ये 'वसूली' के लालच में अवैध रूप से फील्ड में जाकर दबंगई कर रहे थे। ऑडियो-वीडियो साक्ष्यों ने इनकी पोल खोल दी और सेवा तत्काल समाप्त कर दी गई।
 
रवि शंकर कुमार (आवास सहायक, सुन्दरपट्टी व चोरमा): अयोग्य लोगों को लाभ पहुंचाने और भ्रष्टाचार में मिलीभगत के दोषी पाए गए। दंड स्वरूप अगले 2 वर्षों तक इनके मानदेय में 15% की कटौती की जाएगी।
 
असरारूल हक (आवास सहायक, राजेपुर नवादा): गलत जियो टैगिंग और अयोग्य लाभुकों को सरकारी धन बांटने के आरोप सिद्ध हुए। इनके मानदेय में भी 15% की कटौती का आदेश हुआ है।
 
मो० राशिद कुमार (आवास पर्यवेक्षक): अपने अधीनस्थ कर्मियों की निगरानी में घोर लापरवाही बरतने के कारण इनके मानदेय में 10% की कटौती की गई है।
खबर के मुख्य हाईलाइट्स: कैसे हुआ सरकारी धन का बंदरबांट?
 
अवैध वसूली का ऑडियो कांड: कार्यपालक सहायक विनय कुमार के वसूली से जुड़े ऑडियो-वीडियो साक्ष्यों ने प्रशासन के सामने उनकी संलिप्तता पूरी तरह स्पष्ट कर दी।
 अमीरों को मिला 'गरीबों का घर': सुन्दरपट्टी पंचायत में गायत्री देवी और पासुपति देवी जैसे अपात्रों को आवास आवंटित कर दिया गया, जिनके पास पहले से ही पक्के मकान थे।
 बिचौलियों का 'सिंडिकेट': जांच में यह भी खुलासा हुआ कि वार्ड सदस्यों के पति लाभुकों से पैसे वसूलने के इस खेल में सक्रिय थे।
 फर्जी जियो टैगिंग का खेल: सरकारी रिकॉर्ड में दूसरे का घर दिखाकर किस्तों का भुगतान किया गया, जो सीधे तौर पर सरकारी खजाने की लूट है।

प्रशासनिक संदेश: भ्रष्टाचार किया तो नपेंगे!

जिला प्रशासन ने इस कार्रवाई के जरिए स्पष्ट कर दिया है कि गरीबों की गाढ़ी कमाई और सरकारी योजनाओं का पैसा डकारने वाले किसी भी कर्मी को बख्शा नहीं जाएगा। पकड़ीदयाल की यह कार्रवाई जिले के अन्य भ्रष्ट कर्मियों के लिए एक 'सबक' और 'चेतावनी' है। जिलाधिकारी के कड़े रुख ने यह साफ कर दिया है कि विकास कार्यों में पारदर्शिता ही सर्वोपरि है।