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मनुष्य का सबसे बड़ा न्यायालय मन होता है: बिमल सर्राफ

लोकल डेस्क, आकाश अस्थाना।

रक्सौल। लोग अक्सर सच कहने से बचते हैं या डरते हैं पर सत्य कभी छुप नहीं सकता और न ही कभी मिट सकता है।उक्त विचार लायंस क्लब ऑफ रक्सौल के अध्यक्ष सह मीडिया प्रभारी सह सामाजिक कार्यकर्ता एवं भारत विकास परिषद् , रक्सौल के सेवा संयोजक सह मीडिया प्रभारी बिमल सर्राफ ने प्रेस से साझा किया।कितना भी छुपा ले पर सच तो उजागर हो ही जायेगा।

मृत्यु होने के लिए शरीर का नश्वर होना आवश्यक नहीं,जीते जी भावों का शून्य हो जाना भी मृत्यु के समान है। जब किसी इंसान का बुरा करके भी आपको बुरा ना लगे,तब समझ लीजिए कि बुराई आपके चरित्र में आ गयी है। यदि कोई हमारी गलतियां निकालता है तो हमें खुश होना चाहिए क्योंकि कोई तो है जो हमें पूर्ण दोष रहित बनाने के लिए अपना दिमाग और समय दे रहा है। सबसे बड़ा न्यायालय आपका मन होता है,क्या सही है और क्या गलत उसे पता होता है। दूसरों के विचारों को मान देते चलिए तो आप स्वतः ही सम्माननीय बन जाएंगे।

कोई भी हमारे जीवन की समस्याओं को सुलझाने नहीं आयेगा,हमारे जीवन का संपूर्ण कर्तव्य केवल और केवल हमारा है,इसी सत्य को स्वीकारें और अपने भाग्य के निर्माता स्वयं बनें । कर्मफल पर विश्वास रखें जो व्यक्ति कर्मफल पर विश्वास रखते हैं, वह कभी किसी को बद्दुआ नहीं देते। कर्मफल पर विश्वास रखने वाले व्यक्ति को अगर कहीं से दुःख पीड़ा असहयोग की स्थिति सामने आती है तो वह यही सोच रखकर सहज रहते हैं कि कर्मफल तो भोगना ही पड़ेगा,ऐसा मानकर शांत एवं मुस्कान बनाएं रखते हैं, जिनके द्वारा कभी अतीत में कोई दुःख मिला हो और अगर उन्हें कभी परेशान दुःखी देखते हैं तो स्वयं खुश नहीं होते बल्कि कोशिश करते हैं कि मैं इनको क्या सहयोग कर सकता हूं। कर्मफल पर विश्वास रखें, अंततः भोगना ही पड़ेगा,शांति मिलेगी ज़िंदगी में। किताबें और इंसान दोनों को पढ़ना सीखिए किताबों से ज्ञान और इंसान से अनुभव मिलता है!