नेशनल डेस्क, नीतीश कुमार
कोलकाता, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि आयोग की न केवल भाजपा बल्कि कांग्रेस और द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) जैसे विपक्षी दलों के साथ भी कोई ‘सांठगांठ’ है।
नादिया जिले के नकाशिपारा में एक रैली को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने द्रमुक अध्यक्ष एम.के. स्टालिन का नाम लेते हुए चुनाव आयोग, कांग्रेस और द्रमुक के बीच संभावित ‘आंतरिक सांठगांठ’ पर संदेह जताया।
उनकी यह टिप्पणी इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि अब तक वह चुनाव आयोग और भाजपा पर मिलकर काम करने का आरोप लगाती रही हैं, लेकिन पहली बार उन्होंने सार्वजनिक रूप से विपक्षी सहयोगियों पर भी सवाल उठाया है।
ममता बनर्जी ने चुनावी प्रक्रिया के दौरान पश्चिम बंगाल से आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के बड़े पैमाने पर तबादलों का भी विरोध किया। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों को ‘अंधाधुंध’ तरीके से हटाया जा रहा है और इसके पीछे की मंशा संदिग्ध है।
उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल के अधिकारियों को असमान रूप से तमिलनाडु भेजा जा रहा है, जिससे किसी बड़ी साजिश की आशंका जताई जा सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि “सभी को तमिलनाडु भेज दिया गया है, इससे लगता है कि कांग्रेस और स्टालिन के साथ कोई आंतरिक समझौता है।”
मुख्यमंत्री ने कोलकाता पुलिस आयुक्त सुप्रतिम सरकार को हटाए जाने पर भी सवाल उठाए और इसे मानवीय आधार पर गलत बताया। उन्होंने कहा कि अधिकारियों ने बिना संवेदनशीलता के काम किया है और पूछा कि इस तरह का बड़ा फेरबदल केवल पश्चिम बंगाल में ही क्यों किया गया।
उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों से आए ‘बाहरी लोग’ राज्य की चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं।
गौरतलब है कि ममता बनर्जी और एम.के. स्टालिन के बीच पहले सौहार्दपूर्ण राजनीतिक संबंध रहे हैं और दोनों नेता राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी गठबंधन, जिसमें इंडिया गठबंधन भी शामिल है, में एक-दूसरे का समर्थन करते रहे हैं।






