नेशनल डेस्क, आर्या कुमारी।
मुंबई। Maharashtra सरकार के सामाजिक न्याय विभाग ने मुस्लिम समुदाय को शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी व अर्ध-सरकारी नौकरियों में दिए जा रहे 5 प्रतिशत आरक्षण को रद्द करने का निर्णय लिया है। इस संबंध में विभाग ने सरकारी संकल्प (जीआर) जारी कर पूर्व आदेश वापस ले लिया है।
सरकार के अनुसार यह फैसला न्यायालयों के निर्णयों और वर्ष 2014 में बनी नीति से जुड़ी वर्तमान कानूनी स्थिति को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। यह आरक्षण सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्ग (SEBC) के तहत कुछ मुस्लिम समुदायों को दिया गया था, जिसे अब समाप्त कर दिया गया है।
राज्य में मुस्लिम समुदाय की आबादी करीब 11.5 प्रतिशत बताई जाती है। पूर्व में न्यायमूर्ति राजिंदर सच्चर आयोग (2006) और न्यायमूर्ति रंगनाथ मिश्रा समिति (2004) की रिपोर्टों में समुदाय की शैक्षणिक और आर्थिक स्थिति पर चिंता जताई गई थी। इसके बाद 2009 में गठित डॉ. महमूदुर रहमान समिति ने शिक्षा और रोजगार में 8 प्रतिशत आरक्षण की सिफारिश की थी।
वर्ष 2014 में तत्कालीन कांग्रेस-एनसीपी सरकार ने विधानसभा चुनाव से पहले अध्यादेश लाकर मराठा समुदाय को 16 प्रतिशत और मुस्लिम समुदाय को 5 प्रतिशत आरक्षण देने की घोषणा की थी। उस समय 50 मुस्लिम समुदायों को विशेष पिछड़ा वर्ग-ए में शामिल कर यह कोटा लागू किया गया था। अब ताजा निर्णय के साथ यह प्रावधान समाप्त हो गया है।







