स्टेट डेस्क, एन के सिंह।
बिहार के सुप्रसिद्ध न्यूरो सर्जन डॉ. रवि भूषण शर्मा द्वारा आयोजित निःशुल्क शिविर में सीतामढ़ी, शिवहर और नेपाल तक के हजारों मरीजों को मिला मुफ्त परामर्श और उपचार।
पूर्वी चंपारण/ पटना: महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर संपूर्ण पूर्वी चम्पारण जिला अध्यात्म और सेवा के एक अनूठे संगम का साक्षी बना। सुबह की पहली किरण फूटते ही मंदिरों की घंटियों की मधुर गूंज और 'हर-हर महादेव' के गगनभेदी जयघोष से पूरा वातावरण शिवमय हो गया। जिले के सुप्रसिद्ध शिवालयों, चाहे वह अरेराज हो, केसरिया हो या नारायणपुर, हर तरफ भक्तों का रेला उमड़ पड़ा। लेकिन इस वर्ष सबसे खास दृश्य जिहुली स्थित सोमेश्वर महादेव मंदिर में देखने को मिला, जहाँ आस्था की लहरों के साथ-साथ मानवता और सेवा की अविरल धारा भी बह रही थी। सुप्रसिद्ध न्यूरो सर्जन डॉ. रवि भूषण शर्मा द्वारा स्थापित यह मंदिर न केवल श्रद्धालुओं की अटूट श्रद्धा का केंद्र बना, बल्कि हज़ारों जरूरतमंदों के लिए उपचार का एक बड़ा सहारा भी साबित हुआ।
जिहुली का सोमेश्वर महादेव मंदिर कांवड़ियों और स्थानीय श्रद्धालुओं के लिए एक अति-महत्वपूर्ण आध्यात्मिक पड़ाव है। बागमती और लाल बक्या नदी के संगम से पवित्र जल लेकर आने वाले कांवड़ियों के लिए यह पहला और सबसे पवित्र पड़ाव माना जाता है। मंदिर की भव्यता और वहां का शांत वातावरण भक्तों को स्वतः ही अपनी ओर खींच लेता है। इस वर्ष भी, डॉ. रवि भूषण शर्मा ने अपने माता-पिता की पावन स्मृति में निर्मित इस देवालय में सपरिवार भगवान आशुतोष का विधिवत जलाभिषेक किया। बाबा के दर्शन के उपरांत भक्तों ने परिसर में स्थित भैरव बाबा का आशीर्वाद लिया, जिससे मंदिर प्रांगण एक अलौकिक ऊर्जा से सराबोर दिखा।
इस उत्सव की सबसे बड़ी विशेषता 'भक्ति के साथ शक्ति और सेवा' का वो संकल्प रहा, जिसे डॉ. रवि भूषण शर्मा और डॉ. उषा शर्मा ने बखूबी निभाया। पूजा-अर्चना के तत्काल बाद मंदिर परिसर एक विशाल चिकित्सा केंद्र के रूप में तब्दील हो गया। डॉ. शर्मा ने एक भव्य निःशुल्क चिकित्सा शिविर का आयोजन कर यह संदेश दिया कि 'नर सेवा ही नारायण सेवा' है। इस शिविर में न केवल स्थानीय लोग, बल्कि सीतामढ़ी, शिवहर और यहाँ तक कि पड़ोसी देश नेपाल से आए हज़ारों मरीजों ने अपनी जांच कराई। एक विख्यात न्यूरो सर्जन होने के बावजूद डॉ. रवि भूषण ने अत्यंत सहजता के साथ दूर-दराज से आए मरीजों को मुफ्त परामर्श दिया और उनके स्वास्थ्य की जांच की। भक्तों के लिए यह किसी दोहरी सौगात से कम नहीं था—जहाँ एक ओर उन्हें बाबा के दर्शन से आध्यात्मिक शांति मिली, वहीं दूसरी ओर निःशुल्क चिकित्सा से तन की व्याधियों का भी समाधान हुआ।
मंदिर के आसपास का नजारा किसी बड़े उत्सव जैसा था। प्राचीन तालाब और 'माई अस्थान' के भव्य विकास ने इस स्थल की सुंदरता में चार चांद लगा दिए थे। परिसर में लगे मेले में बच्चों की किलकारियां और बड़ों का उत्साह देखते ही बन रहा था। भारी भीड़ को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और स्वयंसेवकों ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे, ताकि किसी भी श्रद्धालु को असुविधा न हो। देर शाम तक भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं और पूरा क्षेत्र भक्ति के उल्लास में डूबा रहा। डॉ. रवि भूषण शर्मा के इस मानवीय प्रयास ने महाशिवरात्रि को महज एक धार्मिक अनुष्ठान से ऊपर उठाकर समाज सेवा के एक महायज्ञ में बदल दिया।







