स्टेट डेस्क, मुस्कान कुमारी।
मुजफ्फरपुर। उत्तर बिहार की अघोषित राजधानी मुजफ्फरपुर में बहुप्रतीक्षित एयरपोर्ट का निर्माण कार्य विधिवत शुरू हो गया है। पताही स्थित इस हवाई अड्डे के विकसित होने से कपड़ा मंडी, धार्मिक पर्यटन और कृषि उत्पादों का व्यापार नई ऊंचाई पर पहुंचेगा।
मुजफ्फरपुर को उत्तर बिहार का सबसे बड़ा व्यावसायिक केंद्र माना जाता है। यहां की सूतापट्टी, मोतीझील और कल्याणी कपड़ा मंडियां न सिर्फ बिहार बल्कि पड़ोसी देश नेपाल तक के थोक व्यापार का मुख्य केंद्र हैं। वर्तमान में सूरत, अहमदाबाद, मुंबई या दिल्ली के बड़े कपड़ा व्यापारी और टेक्सटाइल निर्माताओं को पहले पटना आना पड़ता है, फिर सड़क मार्ग से मुजफ्फरपुर पहुंचना होता है। एयरपोर्ट बनने के बाद ये सीधे मुजफ्फरपुर आ सकेंगे। इससे समय की बचत होगी और बिजनेस-टू-बिजनेस व्यापार में तेजी आएगी।
कपड़ा मंडी को मिलेगी नई ऊर्जा
एयर कार्गो सुविधा शुरू होने पर लेटेस्ट ट्रेंड और फैशन के कपड़े कुछ ही घंटों में बड़े शहरों से मुजफ्फरपुर पहुंच जाएंगे। इससे व्यापारियों का स्टॉक टर्नओवर तेज होगा और मुनाफा बढ़ेगा। बेला औद्योगिक क्षेत्र में लेदर और टेक्सटाइल पार्क पहले से विकसित हो रहा है। हवाई सुविधा से बड़ी कंपनियां यहां रेडीमेड गारमेंट के कारखाने लगाने के लिए आकर्षित होंगी। स्थानीय स्तर पर कच्चे माल का आयात और तैयार कपड़ों का निर्यात आसान हो जाएगा।
केवल सूतापट्टी में 650 से अधिक दुकानें हैं, जहां सालाना टर्नओवर अरबों का है। यह मंडी उत्तर बिहार के 10 से अधिक जिलों और नेपाल के सीमावर्ती बाजारों के कपड़ा व्यापार को नियंत्रित करती है। नार्थ बिहार चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष श्याम सुंदर भीमसेरिया का कहना है कि एयरपोर्ट से देश के बड़े कपड़ा निर्माता और ब्रांड्स सीधे मुजफ्फरपुर आएंगे। लॉजिस्टिक्स में तेजी आने से मंडी के मौजूदा कारोबार में 25 से 30 प्रतिशत की वृद्धि होने का अनुमान है।
कार्यकारिणी सदस्य महेंद्र तुलस्यान बताते हैं कि सूरत, मुंबई और अहमदाबाद जैसे मैन्युफैक्चरिंग हब मुजफ्फरपुर से 1500 से 3000 किलोमीटर दूर हैं। हवाई सेवा शुरू होने के बाद व्यापारी फैशन के बदलते दौर के साथ कदम मिलाकर चल सकेंगे। नये उत्पाद तेजी से बाजार में पहुंचेंगे। पूर्व महामंत्री सज्जन शर्मा का मानना है कि यह मंडी अंतरराष्ट्रीय और अंतर-जिला व्यापार का मजबूत कॉरिडोर है। एयरपोर्ट से अंतरराज्यीय व्यापार बढ़ेगा और बड़े टेक्सटाइल हब्स से सीधा जुड़ाव हो जाएगा।
धार्मिक पर्यटन को मिलेगा बल
एयरपोर्ट देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए पूरे क्षेत्र के पवित्र स्थलों का मुख्य प्रवेश द्वार बनेगा। जगत जननी मां सीता की प्राकट्य स्थली पुनौराधाम (सीतामढ़ी) जाने वाले श्रद्धालु सीधे मुजफ्फरपुर उतरकर डेढ़ घंटे में दर्शन कर सकेंगे। पुनौराधाम को विश्व स्तरीय धार्मिक पर्यटन हब बनाने के लिए 882 करोड़ रुपये का मेगा प्लान तैयार किया गया है। इससे सालाना पर्यटकों की संख्या में लाखों का इजाफा होगा।
कैथवलिया (पूर्वी चंपारण) में बन रहे विराट रामायण मंदिर का अनुमानित बजट 500 से 1000 करोड़ रुपये के बीच है। मुजफ्फरपुर के करीब स्थित इस मंदिर को देखने के लिए भविष्य में करोड़ों पर्यटक आएंगे। वैशाली का ऐतिहासिक बौद्ध स्तूप, भगवान महावीर की जन्मस्थली और मुजफ्फरपुर का बाबा गरीबनाथ मंदिर भी पर्यटन मानचित्र पर और मजबूती से उभरेंगे।
किसानों और शहर की अर्थव्यवस्था को फायदा
मुजफ्फरपुर की शाही लीची, मखाना और अन्य कृषि उत्पाद एयर कार्गो से देश-विदेश के बाजारों में ताजे पहुंचेंगे। इससे किसानों की आय सीधे बढ़ेगी। शहर में कॉर्पोरेट और वीआईपी मूवमेंट बढ़ने से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के होटल, रेस्तरां और रिसॉर्ट्स का निर्माण तेज होगा। कमर्शियल और रेजिडेंशियल रियल एस्टेट सेक्टर में भी तेजी आएगी।
बिहार में 2024-25 के दौरान 6.30 से 6.50 करोड़ से अधिक घरेलू और करीब सात लाख विदेशी पर्यटक पहुंचे। पर्यटकों की संख्या बढ़ने से होटल, गाइड, परिवहन और मुजफ्फरपुर की प्रसिद्ध लाह की चूड़ियों जैसे हस्तशिल्प बाजार को मजबूती मिलेगी।
हवाई मार्ग से जुड़ने के बाद मुजफ्फरपुर अपने पारंपरिक व्यापारिक स्वरूप को आधुनिक और वैश्विक स्पर्श दे सकेगा। यह शहर उत्तर बिहार ही नहीं, पूरे पूर्वी भारत का प्रमुख कमर्शियल हब बनकर उभरेगा।






