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मोतिहारी: ऐतिहासिक धनौती नदी मरीन ड्राइव परियोजना को मंजूरी

लोकल डेस्क, एन के सिंह।
182 किमी लंबी इस पवित्र नदी के तट पर संत कबीर ने किया था रात्रि विश्राम, स्मृतियों से जुड़ी यह पवित्र जलधारा अब बिखेरेगी अपनी आभा।

पूर्वी चंपारणः बिहार के पूर्वी चंपारण जिले की ऐतिहासिक पहचान और आध्यात्मिक महत्व वाली धनौती नदी के दिन अब बहुरने वाले हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली बिहार सरकार ने इस पवित्र नदी के किनारे मरीन ड्राइव निर्माण के महत्वाकांक्षी प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है। यह परियोजना न केवल मोतिहारी शहर के सौंदर्याकरण में मील का पत्थर साबित होगी, बल्कि वर्षों से अतिक्रमण की मार झेल रही इस नदी को नया जीवन भी प्रदान करेगी। पश्चिमी चंपारण के नौतन प्रखंड स्थित हरहा नदी से निकलकर 182 किलोमीटर का लंबा सफर तय करने वाली धनौती नदी का इतिहास अत्यंत गौरवशाली रहा है। यह नदी पूर्वी चंपारण के पहाड़पुर, हरसिद्धि, तुरकौलिया, बंजारिया, मोतिहारी और पिपराकोठी जैसे महत्वपूर्ण ब्लॉकों से गुजरते हुए चकिया के सीताकुंड के समीप बूढ़ी गंडक में समाहित होती है। इस परियोजना की मंजूरी से स्थानीय निवासियों में भारी उत्साह है और उन्होंने इसे शहर के विकास के लिए एक दूरगामी कदम बताते हुए सरकार का आभार प्रकट किया है।

इस नदी का आध्यात्मिक महत्व इस बात से समझा जा सकता है कि महान समाज सुधारक और संत कबीर दास ने अपने शिष्य के साथ मलाही स्थित कबीरपंथ मठ जाने के क्रम में इसी नदी के तट पर रात्रि विश्राम किया था। मोतिहारी शहर के बलुआ ओवरब्रिज के समीप जहाँ कभी नदी की कल-कल करती शीतल जलधारा बहती थी, आज भी वहाँ संत कबीर का एक छोटा सा मंदिर उनकी यादों को संजोए हुए है। यहाँ से प्रस्थान कर वे मलाही स्थित कबीरहा मठ पहुँचे थे, जहाँ उन्होंने प्रवास किया और ऐतिहासिक कुएं पर स्नान किया था। विडंबना यह है कि वह ऐतिहासिक मठ और स्वयं यह पवित्र नदी आज अतिक्रमण की गंभीर समस्या से जूझ रही है। पिछले 100 वर्षों में नदी की स्थिति इतनी विकट हो गई है कि जो नदी कभी 250 फीट चौड़ी हुआ करती थी, वह आज सिमटकर महज 40 फीट के एक संकीर्ण नाले में तब्दील हो गई है। बलुआ रोड पुल के पास प्रदूषित पानी और दुर्गंध ने स्थानीय लोगों का जीना मुहाल कर दिया है, लेकिन अब मरीन ड्राइव बनने से इस स्थिति में आमूलचूल परिवर्तन आने की उम्मीद है।

पूर्वी चंपारण के जिलाधिकारी सौरभ जोरवाल ने स्पष्ट किया है कि मरीन ड्राइव के निर्माण का कार्य जल्द ही धरातल पर उतरेगा और इसके लिए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। नदी को उसके पुराने स्वरूप में लौटाने के लिए बड़े पैमाने पर गाद निकालने और सफाई अभियान की रूपरेखा तैयार कर ली गई है। प्रशासन ने नदी की जमीन पर अवैध कब्जा जमाए 67 अतिक्रमणकारियों की पहचान कर उन्हें नोटिस जारी कर दिया है, जिससे यह साफ संदेश गया है कि विकास की राह में कोई भी बाधा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस परियोजना के तहत न केवल जलकुंभी हटाकर जल की गुणवत्ता में सुधार किया जाएगा, बल्कि नदी के प्रवाह को बहाल कर इसे सिंचाई और मछली पालन के योग्य भी बनाया जाएगा।

मोतिहारी के निवासियों के लिए यह मरीन ड्राइव न केवल पर्यटन का केंद्र बनेगा, बल्कि यातायात की समस्या का भी स्थायी समाधान करेगा। वर्तमान में बलुआ-कोर्ट रोड पर लगने वाले भीषण जाम से लोगों को निजात मिलेगी क्योंकि यह सड़क आवागमन के लिए एक बेहतरीन वैकल्पिक मार्ग प्रदान करेगी। पटना के मरीन ड्राइव की तर्ज पर जब धनौती के तट सजेंगे, तो यह मोतिहारी की ऐतिहासिकता और आधुनिकता का एक अद्भुत संगम होगा। जिला प्रशासन और राज्य सरकार के इस साझा प्रयास से अब यह उम्मीद जगी है कि संत कबीर की स्मृतियों को संजोने वाली यह पावन धारा एक बार फिर अपने पुराने वैभव के साथ बहेगी और मोतिहारी शहर की सुंदरता में चार चांद लगाएगी।