लोकल डेस्क, एन के सिंह।
सोते हुए पिता पर दाब से वार कर उतार दिया था मौत के घाट, अब ताउम्र जेल की सलाखें बनी नसीब।
पूर्वी चम्पारण: रिश्तों को शर्मसार और मानवता को कलंकित करने वाले एक जघन्य हत्याकांड में न्याय के मंदिर ने अपना कड़ा फैसला सुनाया है। जिस बेटे को पिता ने उंगली पकड़कर चलना सिखाया, उसी बेटे ने चंद रुपयों की खातिर पिता की गर्दन पर धारदार हथियार (दबिया) चला दिया। पूर्वी चम्पारण के द्वितीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश विद्या प्रसाद की अदालत ने इस 'कलयुगी' बेटे ललन पंडित को उम्रकैद की सजा सुनाई है।
पिता की पेंशन राशि हड़पने का विवाद
आधी रात का खौफ: जब रक्षक ही बन गया भक्षक
घटना की पटकथा लालच और पारिवारिक कलह से लिखी गई थी। मृतक लालजी पंडित की पत्नी महादेवी द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी (कांड संख्या 288/2023) के अनुसार, बेटा ललन अक्सर अपने पिता पर पेंशन के पैसे देने का दबाव बनाता था। पिता के इनकार करने पर वह अक्सर हिंसक हो जाता था।
16 अगस्त 2023 की वह काली रात जब लालजी पंडित अपनी पत्नी के साथ बेफिक्र सो रहे थे, तभी रात के करीब 12 बजे मौत बनकर ललन छत के रास्ते घर में दाखिल हुआ। उसने सोते हुए पिता पर धारदार दबिया से ताबड़तोड़ वार किए। देखते ही देखते बिछावन खून से लाल हो गया और एक पिता की सांसें उसके अपने ही अंश ने छीन लीं।
"न्यायालय का यह फैसला समाज में एक कड़ा संदेश है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है, चाहे वह सगा संबंधी ही क्यों न हो।" – कानूनी विशेषज्ञ
न्याय की जीत: गवाहों और सबूतों ने पुख्ता की सजा
पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित जांच कर न्यायालय में आरोप पत्र (Charge Sheet) दाखिल किया था। सत्रवाद संख्या 52/2024 के विचारण के दौरान अपर लोक अभियोजक सुदामा बैठा ने अभियोजन की ओर से कुल सात गवाहों को पेश किया।
अदालत ने गवाहों के बयान और वैज्ञानिक साक्ष्यों को आधार मानते हुए ललन पंडित को धारा 302 भादवि (IPC) के तहत दोषी पाया। अदालत ने स्पष्ट किया कि दोषी द्वारा जेल में बिताई गई पिछली अवधि को उसकी कुल सजा में समायोजित किया जाएगा।







