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मोतिहारी समेत पूरे सूबे में रसोई पर 'डिजिटल' ताला

नेशनल डेस्क, एन के सिंह।

क्या 'सर्वर' खा गया गरीबों का निवाला? ऑनलाइन बुकिंग का सिस्टम हुआ ध्वस्त, गैस गोदामों में बंद, उपभोक्ता सड़कों पर बेबस।
गांवों में 45 दिन से पहले नहीं मिलेगी दूसरी रिफिल, शहरों में भी बढ़ी वेटिंग की मियाद।

 

पूर्वी चम्पारण: एक तरफ सात समंदर पार खाड़ी देशों में ईरान-इजराइल के बीच छिड़ी जंग की तपिश है, तो दूसरी तरफ अपने ही देश के तकनीकी 'सर्वर' की बेरुखी। इन दोनों पाटों के बीच आम आदमी की रसोई का बजट और सुकून, दोनों ही बुरी तरह झुलस रहे हैं। पूर्वी चम्पारण सहित पूरे बिहार ही नहीं देश भर तमाम सरकारी दावों के बीच में घरेलू गैस (LPG) को लेकर मचे हाहाकार ने अब एक ऐसा मोड़ ले लिया है, जहां प्रशासन के 'दावे' और जनता के 'चूल्हे' के बीच की दूरी मीलों लंबी हो गई है।
 

सर्वर के जाल में फंसी बुकिंग, गोदाम फुल पर चूल्हे गुल

जिले में इंडियन और एचपी गैस के उपभोक्ताओं के लिए उनका अपना 'टोल फ्री नंबर' ही सबसे बड़ी मुसीबत बन गया है। पिछले कई दिनों से सर्वर की तकनीकी खराबी के कारण बुकिंग की प्रक्रिया पूरी तरह ठप है। विडंबना देखिए—प्रशासन कह रहा है कि "स्टॉक पर्याप्त है", लेकिन बिना ऑनलाइन बुकिंग के एजेंसियां सिलेंडर देने से साफ इनकार कर रही हैं। तकनीकी खामियों के इस मकड़जाल ने उपभोक्ताओं को दर-दर भटकने पर मजबूर कर दिया है, जिससे लोगों में भारी आक्रोश व्याप्त है।

ईरान-इजराइल जंग: 'होरमुज की खाड़ी' से रसोई तक का संकट

वैश्विक भू-राजनीति ने इस संकट की आग में घी डालने का काम किया है। ईरान पर हो रहे हमलों के चलते 'होरमुज की खाड़ी' (Strait of Hormuz) का व्यापारिक मार्ग बाधित है। चूंकि भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आयात करता है, इसलिए सप्लाई चेन चरमरा गई है। इसी को देखते हुए पेट्रोलियम मंत्रालय ने आपूर्ति को नियंत्रित करने के लिए नियमों की बेड़ियां और सख्त कर दी हैं।

गांवों पर '45 दिन' का कड़ा पहरा

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी के निर्देशों के बाद लागू नए नियमों ने ग्रामीण इलाकों की कमर तोड़ दी है। अब गांवों में दो सिलेंडरों के बीच 45 दिन का अनिवार्य अंतर रखना होगा। वहीं शहरी क्षेत्रों में भी यह सीमा 21 से बढ़ाकर 25 दिन कर दी गई है। सरकार इसे जमाखोरी रोकने का कदम बता रही है, लेकिन हकीकत यह है कि बड़े परिवारों के लिए डेढ़ महीने तक एक सिलेंडर चलाना किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है।

कालाबाजारी का 'नंगा नाच' और इंडक्शन का दौर

सिस्टम की विफलता का सीधा फायदा बिचौलिए उठा रहे हैं। जिले के कई इलाकों से खबरें आ रही हैं कि 1000 रुपये वाला सिलेंडर 2000 रुपये तक की ब्लैक में बिक रहा है। वहीं, व्यावसायिक सिलेंडरों की किल्लत ने छोटे होटल और ढाबा संचालकों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा कर दिया है। यही कारण है कि अब गैस चूल्हों की जगह 'इंडक्शन' ने ले ली है। बाजार में अचानक बिजली से चलने वाले चूल्हों की मांग में भारी उछाल आया है।

फिलहाल स्थिति 'आपूर्ति' से ज्यादा 'सिस्टम' की विफलता की ओर इशारा कर रही है। यदि सर्वर की समस्या जल्द हल नहीं हुई और खाड़ी देशों के हालात सामान्य नहीं हुए, तो आने वाले दिनों में आम जनता के लिए दो वक्त की रोटी का इंतजाम करना और भी महंगा और दूभर साबित हो सकता है। इधर जिला अधिकारी सौरव अग्रवाल रोड पुलिस अधीक्षकने कालेबाज़हरियों पर रोक लगाने के लिए नंबर जारी की है।