स्टेट डेस्क, एन के सिंह।
बिहार सरकार की अनूठी पहल: पूर्वी चंपारण के 54 पंचायतों में आयोजित हुआ भव्य 'सहयोग शिविर', उमड़ा जनसैलाब, भूमि विवाद, राशन और पेंशन से जुड़े मामलों पर प्रभारी मंत्री का कड़ा रुख, अधिकारियों को दिए त्वरित निष्पादन के निर्देश
पूर्वी चंपारण: बिहार सरकार के ग्रामीण विकास विभाग एवं सूचना जनसंपर्क विभाग के मंत्री सह मोतिहारी जिले के प्रभारी मंत्री श्रवण कुमार ने आज पूर्वी चंपारण जिले में सुशासन और जन-कल्याण की एक नई इबारत लिखी। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की विशेष प्रेरणा और मार्गदर्शन में आयोजित इस वृहद 'सहयोग शिविर' के तहत प्रभारी मंत्री ने खुद जिले के विभिन्न प्रखंडों का सघन दौरा किया। उन्होंने मेहसी प्रखंड के हरपुर नाग, चकिया प्रखंड के चिंतामनपुर और पिपराकोठी के वीरपुर छपरा में आयोजित भव्य सहयोग शिविरों में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया। इस महा-आयोजन में जिले की 54 पंचायतों के हजारों ग्रामीणों ने हिस्सा लिया, जिससे यह शिविर महज एक सरकारी कार्यक्रम न रहकर जन-आकांक्षाओं का महाकुंभ बन गया।
मंत्री श्रवण कुमार ने मेहसी, चकिया और पिपराकोठी प्रखंडों के गांवों में सीधे चौपाल लगाकर आम जनता से संवाद किया।
अधिकारियों को अल्टीमेटम शिविर में प्राप्त शिकायतों के निष्पादन में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को मंत्री ने सख्त लहजे में पारदर्शिता और तत्परता बनाए रखने की चेतावनी दी।
प्रशासनिक अमला रहा मुस्तैद
जिलाधिकारी सौरभ जोरवाल और पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात सहित जिले के तमाम आला अधिकारी पूरे समय मौके पर डटे रहे।
महिला और युवाओं की भारी भागीदारी
सामाजिक सुरक्षा पेंशन, राशन कार्ड और मुख्यमंत्री आवास योजना को लेकर महिलाओं और बुजुर्गों में अभूतपूर्व उत्साह देखा गया।
जनता और प्रशासन के बीच की दूरी हुई खत्म,सीधे संवाद से निकले समाधान
आयोजित सहयोग शिविरों में जमीनी स्तर पर लोकतंत्र की बेहद खूबसूरत तस्वीर देखने को मिली। मंत्री श्रवण कुमार ने वीआईपी संस्कृति से दूर हटकर सीधे आमजनों के बीच जाकर उनकी समस्याओं, शिकायतों और आवश्यकताओं को अत्यंत गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ सुना।
शिविर में उमड़े जनसैलाब ने मंत्री के समक्ष मुख्य रूप से
भूमि विवाद एवं राजस्व मामले
सामाजिक सुरक्षा पेंशन और वृद्धावस्था सहायता
राशन कार्ड में गड़बड़ियां और नए नाम जोड़ना
मुख्यमंत्री आवास योजना एवं ग्रामीण सड़कें
पेयजल (नल-जल योजना), बिजली और स्वास्थ्य सेवाएं
जैसे गंभीर और जनहित से जुड़े मामलों को पुरजोर तरीके से रखा। मंत्री ने मौके पर ही एक-एक आवेदन का संज्ञान लिया और संबंधित काउंटर के अधिकारियों को बुलाकर उनका ऑन-द-स्पॉट और गुणवत्तापूर्ण निपटारा करने का कड़ा निर्देश दिया।
"अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक लाभ पहुंचाना सरकार का संकल्प" श्रवण कुमार
शिविर में उपस्थित विशाल जनसमूह को संबोधित करते हुए प्रभारी मंत्री श्रवण कुमार ने सरकार की मंशा को साफ तौर पर रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि "बिहार सरकार आम नागरिकों की समस्याओं के समाधान हेतु अब फाइलों में नहीं, बल्कि खुद गांव-गांव तक प्रशासनिक पहुंच सुनिश्चित कर रही है। यह सहयोग शिविर केवल सरकारी योजनाओं की जानकारी देने का कोई औपचारिक माध्यम नहीं है, बल्कि यह जनता और प्रशासन के बीच टूटे हुए विश्वास को जोड़ने और संवाद को मजबूत करने का एक प्रभावी मंच है।"
मंत्री ने आगे जोड़ते हुए कहा कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में राज्य सरकार की यह साफ सोच है कि किसी भी गरीब, असहाय या ग्रामीण व्यक्ति को अपनी छोटी-छोटी समस्याओं या हक के लिए ब्लॉक और जिला कार्यालयों के चक्कर न काटना पड़े। सरकार की नीतियां आखिरी कतार में खड़े व्यक्ति के जीवन में बदलाव लाने के लिए समर्पित हैं और यह सहयोग शिविर इसी जनोन्मुखी सोच का सीधा परिणाम है।
पारदर्शिता से समझौता नहीं, योग्य लाभुकों को समय पर मिले अधिकार
मंच से अधिकारियों को कड़ा संदेश देते हुए मंत्री ने स्पष्ट किया कि शिविर में आए हर एक आवेदन की बकायदा ट्रैकिंग होगी। उन्होंने मौके पर मौजूद उप विकास आयुक्त (DDC), अपर समाहर्ता (ADM) और अन्य विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि आवेदनों के निष्पादन में पूरी पारदर्शिता बरती जाए। यदि किसी योग्य लाभुक को तय समय सीमा के भीतर योजना का लाभ नहीं मिला, तो संबंधित अधिकारी की जवाबदेही तय कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जिले के शीर्ष अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति
इस बड़े पैमाने पर आयोजित कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर दिखा। सहयोग शिविर के दौरान जिला अधिकारी सौरभ जोरवाल, पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात, उप विकास आयुक्त, अपर समाहर्ता, विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय और ब्लॉक स्तरीय अधिकारी, स्थानीय जनप्रतिनिधिगण सहित भारी संख्या में ग्रामीण, महिलाएं और क्षेत्र के प्रबुद्ध युवा उपस्थित रहे। पुलिस प्रशासन द्वारा सुरक्षा और कानून व्यवस्था के भी पुख्ता इंतजाम किए गए थे।
यह आयोजन पूर्वी चंपारण के इतिहास में प्रशासनिक मुस्तैदी और जन-सेवा का एक बेहतरीन उदाहरण बनकर उभरा है।







